यूपी के मुरादाबाद के एक गांव के रहने वाले भुवनेश कुमार 21 साल की उम्र में एसएससी सीजीएल निकाल केंद्र सरकार कई सरकारी नौकरी भर्ती परीक्षाओं में फेल होने के बाद भुवनेश को गांव के एक शख्स ने ताना मारा – बिना दिल्ली जाए इस गांव में कोई पैदा नहीं हुआ जो SSC CGL परीक्षा निकाल दे। तब भुवनेश की उम्र करीब 18 वर्ष थी। उन्हें यह ताना चुभ गया। इस बात को अपनी ईगो पर लिया और ठान लिया कि वे बिना दिल्ली गए ही गांव से यह परीक्षा पास करके दिखाएंगे। महज 21 साल की उम्र में उन्होंने बिना कोचिंग गांव से पढ़कर वो एसएससी सीजीएल भर्ती परीक्षा क्रैक कर डाली जिसमें देश के 30 से 35 लाख युवा आवेदन करते हैं। वह केंद्रीय सचिवालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर बने। यूपी के मुरादाबाद के पास जटपुरा गांव के रहने वाले भुवनेश को यह सफलता कोई अचानक नहीं मिली। इस राह में उनके रास्ते में पैसों की तंगी समेत कई बाधाएं आईं लेकिन उन्होंने घुटने नहीं टेके। एक समय था जब वह अपना गुजारा चलाने के लिए 25 रुपये में ट्यूशन पढ़ाते थे, आज हर महीने उनके अकाउंट में 81000 प्लस सैलरी आ रही है।
पिता ने 45 साल तक की थी सरकारी नौकरी की तैयारी, एक्सीडेंट से बेड पर आ गए
जब भुवनेश मात्र 13 वर्ष के थे, तब उनके किसान पिता का एक्सीडेंट हो गया जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई और वे पूरी तरह बेड पर आ गए। भुवनेश 9वीं कक्षा में थे। उन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए 45 साल तक तैयारी की थी। पिता ही घर में अकेल कमाने वाले सदस्य थे और उन्होंने खुद 45 वर्ष की उम्र तक सरकारी नौकरी की तैयारी की थी, पर असफल रहे थे। पिता के बेड पर आने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई।
10वीं 12वीं में टॉप किया
चाचा जी ने बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाने की बात कही, लेकिन मां की सीख पर भुवनेश ने खुद जिम्मेदारियां लीं। उन्होंने डॉ. बीआर. अंबेडकर और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों की किताबें पढ़ीं और पढ़ाई के प्रति समर्पित हो गए। जो बच्चा 8वीं-9वीं तक पढ़ाई में मन नहीं लगाता था, उसने 10वीं में अपना स्कूल टॉप किया और 12वीं में कॉलेज टॉप किया। यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल से पूरी की और बाद में गणित (बीएससी मैथ्स) में ग्रेजुएशन किया
25 रुपये में ट्यूशन पढ़ाया
पिता के बेड पर आने के बाद घर का खर्च चलाने और अपनी पढ़ाई के लिए कॉपी-पेन का इंतजाम करने के लिए भुवनेश ने 13 साल की उम्र में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। वे 3 बच्चों से 25 रुपये फीस लेकर 75 रुपये कमाते थे। जोश टॉक्स में अपने बारे में उन्होंने बताया कि घर में पिता के दर्द से कराहने की आवाजों के कारण पढ़ाई प्रभावित होती थी। उन्होंने लाइब्रेरी में पढ़ाई की ठानी। गांव से 10 किमी दूर स्थित लाइब्रेरी जाने के लिए वे बस से सफर करते थे और रास्ते में पर्चों व फोन में वोकैब याद करते हुए जाते थे।
चपरासी परीक्षा में भी फेल होने का सबसे बड़ा झटका
10वीं 12वीं पास करने और ग्रेजुएशन करने के बीच वह कई भर्ती परीक्षाएं दे चुके थे। लगातार 13-14 परीक्षाओं में असफलता के बाद उन्हें सबसे तगड़ा झटका तब लगा जब वह चपरासी की परीक्षा कहे जाने वाली एसससी एमटीएस भर्ती परीक्षा में भी नाकाम रहे। वे टूट गए और सोचने लगे कि “क्या मैं चपरासी बनने के लायक भी नहीं हूं?”
जब वे दुखी होकर अपनी मां के पास गए, तो मां ने कहा – ‘बेटा तेरी लाइफ में कुछ ना कुछ बेहतर लिखा है।
एमटीएस फेल ने निकाला SSC CGL, यूपी के भुवनेश्वर कुमार की कहानी
कई सरकारी नौकरी भर्ती परीक्षाओं में फेल होने के बाद भुवनेश को गांव के एक शख्स ने ताना मारा – बिना दिल्ली जाए इस गांव में कोई पैदा नहीं हुआ जो SSC CGL परीक्षा निकाल दे। तब भुवनेश की उम्र करीब 18 वर्ष थी। उन्हें यह ताना चुभ गया। इस बात को अपनी ईगो पर लिया और ठान लिया कि वे बिना दिल्ली गए ही गांव से यह परीक्षा पास करके दिखाएंगे। महज 21 साल की उम्र में उन्होंने बिना कोचिंग गांव से पढ़कर वो एसएससी सीजीएल भर्ती परीक्षा क्रैक कर डाली जिसमें देश के 30 से 35 लाख युवा आवेदन करते हैं। वह केंद्रीय सचिवालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर बने। यूपी के मुरादाबाद के पास जटपुरा गांव के रहने वाले भुवनेश को यह सफलता कोई अचानक नहीं मिली। इस राह में उनके रास्ते में पैसों की तंगी समेत कई बाधाएं आईं लेकिन उन्होंने घुटने नहीं टेके। एक समय था जब वह अपना गुजारा चलाने के लिए 25 रुपये में ट्यूशन पढ़ाते थे, आज हर महीने उनके अकाउंट में 81000 प्लस सैलरी आ रही है।
10वीं 12वीं में टॉप किया
चाचा जी ने बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाने की बात कही, लेकिन मां की सीख पर भुवनेश ने खुद जिम्मेदारियां लीं। उन्होंने डॉ. बीआर. अंबेडकर और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों की किताबें पढ़ीं और पढ़ाई के प्रति समर्पित हो गए। जो बच्चा 8वीं-9वीं तक पढ़ाई में मन नहीं लगाता था, उसने 10वीं में अपना स्कूल टॉप किया और 12वीं में कॉलेज टॉप किया। यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल से पूरी की और बाद में गणित (बीएससी मैथ्स) में ग्रेजुएशन किया।
25 रुपये में ट्यूशन पढ़ाया
पिता के बेड पर आने के बाद घर का खर्च चलाने और अपनी पढ़ाई के लिए कॉपी-पेन का इंतजाम करने के लिए भुवनेश ने 13 साल की उम्र में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। वे 3 बच्चों से 25 रुपये फीस लेकर 75 रुपये कमाते थे।
जोश टॉक्स में अपने बारे में उन्होंने बताया कि घर में पिता के दर्द से कराहने की आवाजों के कारण पढ़ाई प्रभावित होती थी। उन्होंने लाइब्रेरी में पढ़ाई की ठानी। गांव से 10 किमी दूर स्थित लाइब्रेरी जाने के लिए वे बस से सफर करते थे और रास्ते में पर्चों व फोन में वोकैब याद करते हुए जाते थे।
जब वे दुखी होकर अपनी मां के पास गए, तो मां ने कहा – ‘बेटा तेरी लाइफ में कुछ ना कुछ बेहतर लिखा है।
आज का सवाल
अक्टूबर 2026 में किस लोकप्रिय टॉक शो का नया सीजन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शुरू हुआ है, जिसके मेजबान करण जौहर हैं?
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उसी रात आया CGL का रिजल्ट और बने ऑफिसर
MTS के रिजल्ट के ठीक 3 घंटे बाद, उसी रात 12 बजे SSC CGL 2024 का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ। कांपते हाथों से जब उन्होंने पीडीएफ में अपना रोल नंबर सर्च किया, तो उनके नाम के आगे एएसओ इन सीएसएस (लेवल 7 ऑफिसर ) लिखा हुआ था भुवनेश का कुछ सरकारी भर्ती परीक्षाओं का सफर
SSC CGL 2022: प्री क्वालीफाई हुआ, लेकिन टाइपिंग में बाहर हो गए।
SSC CHSL 2023: प्री व मेन्स निकला, लेकिन कंप्यूटर में मात्र 0.5 नंबर से रह गए।
DDA JSA: प्री, मेन्स और टाइपिंग सब पास, लेकिन कंप्यूटर में 1 नंबर से आउट हुए।
DDA ASO: प्री, मेन्स, कंप्यूटर पास, पर टाइपिंग में रह गए।
EPFO SSA: प्री में बहुत अच्छे नंबर थे, टाइपिंग फेल हो गए।




























































