सुप्रीम कोर्ट में एक क्यूरेटिव याचिका दायर की गई

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जिसमें पिछले हफ्ते दिए गए फैसले को वापस लेने की मांग की गई है। दरअसल, ये मामला ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजने के मुद्दे पर हाल ही में आए बंटे हुए फैसले से जुड़ा है, जिसे वापस लेने की मांग की गई है। डॉ. जया ठाकुर ने यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा को इस मामले की तो पहले सुनवाई ही नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि इसमें ‘हितों का सीधा टकराव’ (direct conflict of interest) जुड़ा था। बता दें कि उस खंडित फैसले में जस्टिस शर्मा ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की केंद्र सरकार की मांग का समर्थन किया था। हालांकि बेंच के दूसरे जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की केंद्र की मांग को खारिज कर दिया था।

दोनों जजों ने अलग-अलग राय दी थी

बता दें कि जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा की बेंच ने 23 सितंबर को ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के अधिनियम की धारा 7 और 8 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अलग-अलग राय दी थी। इन धाराओं के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। क्यूरेटिव पिटीशन में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि इस फैसले में “पक्षपात और औचित्य को लेकर उचित आशंका” है, क्योंकि जस्टिस शर्मा के बेटे, सिद्धार्थ शर्मा, जुलाई 2024 से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के लिए स्टैंडिंग काउंसिल (सरकारी वकील) हैं और संबंधित केस में ज्ञानेश कुमार (जो अब मुख्य चुनाव आयुक्त हैं) और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू की नियुक्तियों के खिलाफ ‘को वारंटो’ (अधिकार-पृच्छा) की मांग की गई है।

संविधान पीठ गठित करने के लिए CJI को भेजा

सुनवाई के दौरान केंद्र का कहना था कि मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए क्योंकि इसमें संवैधानिक सवाल शामिल है। जस्टिस दत्ता ने इस मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन जस्टिस शर्मा केंद्र की मांग से सहमत थे। दोनों जजों की राय में अंतर होने के बावजूद, बेंच ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से आग्रह किया कि वे मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित करने पर विचार करें।

हितों का सीधा टकराव

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूरेटिव याचिका में ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि उन्हें 25 सितंबर को मीडिया रिपोर्टों से ही पता चला कि जस्टिस शर्मा के बेटे को ECI का वकील नियुक्त किया गया है। याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ता का सम्मानपूर्वक कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से सिद्धार्थ शर्मा के पेशेवर कर्तव्य और माननीय जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा द्वारा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई के बीच हितों का सीधा टकराव है।” इसमें यह भी कहा गया है कि जस्टिस शर्मा को कार्यवाही शुरू होने से पहले ही अपने बेटे की भूमिका के बारे में बता देना चाहिए था, ताकि न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा बना रहे। रूपा अशोक हुरा बनाम अशोक हुरा मामले का हवाला देते हुए, याचिका में तर्क दिया गया है कि किसी जज का संबंधित पक्षों के साथ अपने संबंध का खुलासा न करना क्यूरेटिव राहत के लिए एक मान्य आधार है, और फैसले को अमान्य करने के लिए असल में पक्षपात होना जरूरी नहीं है, बल्कि पक्षपात की आशंका होना ही काफी है।

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