केंद्रीय शिक्षा मंत्री मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा व्यवस्था और चिंतित अभिभावक मार्क्स वादी
बच्चों के अंकों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने रटकर सीखने की जगह अनुभव से सीखने पर जोर दिया। मंत्री ने द्वारका स्थित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के एकीकृत कार्यालय परिसर में एक्सपीरियंस सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने कहा, विद्यार्थियों का काफी समय याद करने और अच्छे अंक लाने की योजना बनाने में बीत जाता है। अभिभावक भी अक्सर सोचते हैं कि किसी तरह अंक हासिल करने ही हैं। मैं अक्सर कहता हूं कि लोग एक अलग तरह के मार्क्स वादी (अंकवादी) बन गए हैं। विचारधारा की बात अलग है, लेकिन यह मानसिकता लगभग हर अभिभावक में घर कर गई है।’
जोशी ने कहा, ‘इसका नुकसान यह है कि बच्चे की समझ, सीखने की क्षमता और रुचि पर ध्यान नहीं दिया जाता। अच्छे अंक लाने के दबाव के कारण विद्यार्थियों में आत्मविश्वास की भी कमी रह जाती है। किताबों तक सीमित रहने वाला और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल न किया जा सकने वाला ज्ञान बहुत कम काम आता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के पीछे यही सोच है।
मंत्री ने कहा कि रटकर सीखने की जगह अनुभव के माध्यम से सीखने को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चिंतित अभिभावकों को भी किसी तरह बच्चों से अच्छे अंक हासिल करने पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देना बंद करना चाहिए।
सीबीएसई का एक्सपीरियंस सेंटर
जोशी ने सीबीएसई के एक्सपीरियंस सेंटर का उद्घाटन किया। सीबीएसई मुख्यालय में स्थापित यह केंद्र विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक और अनुभव आधारित शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यहां विद्यार्थी शिक्षा के विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य में करियर की संभावनाओं को समझ सकेंगे।
6,000 वर्ग फुट में 12 जोन और 21 प्रदर्शनी
सीबीएसई का यह एक्सपीरियंस सेंटर नई दिल्ली स्थित सीबीएसई इंटीग्रेटेड ऑफिस कॉम्प्लेक्स में 6,000 वर्ग फुट क्षेत्र में बनाया गया है। इसमें 12 प्रमुख जोन और 21 प्रदर्शनी हैं। ये भारतीय शिक्षा की जड़ों से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 तक की यात्रा को दर्शाती हैं। सेंटर में सीबीएसई के विकास को भी प्रदर्शित किया गया है। बोर्ड से संबद्ध स्कूलों की संख्या लगभग 309 से बढ़कर 33,000 से अधिक हो गई है, जबकि विद्यार्थियों की संख्या 15,000 से कम से बढ़कर करीब एक करोड़ तक पहुंच गई है।
इस केंद्र में छात्रों को सबसे पहले ‘शिक्षा की कहानी’ नाम की फिल्म के माध्यम से भारत की शिक्षा व्यवस्था के सफर से परिचित कराया जाएगा। इसमें प्राचीन शिक्षा व्यवस्था से लेकर आधुनिक डिजिटल कक्षाओं तक के विकास को दिखाया जाएगा। छात्र जान सकेंगे कि समय के साथ पढ़ाई के तरीकों में किस तरह बदलाव आया है। इस दौरान उन्हें इन विषयों की जानकारी मिलेगी: नालंदा जैसे शिक्षा केंद्र: भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और शिक्षा के इतिहास की जानकारी।
आधुनिक डिजिटल कक्षाएं: तकनीक की मदद से पढ़ाई के बदलते तरीके।
सीबीएसई का इतिहास: पुरानी तस्वीरों और वर्ष 1935 के अभिलेखों के माध्यम से बोर्ड के इतिहास को जानने का अवसर।
क्या सीख सकेंगे छात्र?
करियर एक्सप्लोरर: करियर के अलग-अलग विकल्पों को समझने में मदद करेगा।
फ्यूचर ऑफ प्रोफेशंस: भविष्य में बदलते पेशों और रोजगार के संभावित अवसरों से परिचित कराएगा।
मैजिक मिरर: फ्यूचर यू: छात्रों को अपने भविष्य और संभावित करियर के बारे में सोचने का अवसर देगा।
नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने में अटल टिंकरिंग लैब की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में 10,000 अटल टिंकरिंग लैब पहले से संचालित हैं। सरकार ने 50,000 अतिरिक्त लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक प्रयोग और समस्या समाधान के अवसर विद्यार्थियों को भविष्य के नवाचारकर्ताओं के रूप में तैयार करने में अहम भूमिका निभायेंगे। प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को वैश्विक कार्यक्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने हाल में शुरू की गयी ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयोग और समस्या समाधान पर आधारित अवसर नई पीढ़ी के नवाचारकर्ताओं को प्रोत्साहित कर सकते हैं।
शिक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि यह केंद्र स्कूली शिक्षा को अधिक रोचक, व्यावहारिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करना बेहद जरूरी है।





























































