ये कहानी एक ऐसे शख्स की है, जो कभी क्रिकेटर तो नहीं बन पाया पर टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने में बड़ रोल प्ले किया

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एक ऐसा शख्स जिसने अपनी रातें शमशान में सोकर गुजारी पर क्रिकेट को कभी अपने आप से दूर नहीं जाने दिया। हाथ टूटने के साथ क्रिकेटर बनने का सपना भी छूट गया पर, वो शख्स कभी भी इस खेल से अपने आप को दूर नहीं कर पाया। ये कहानी है टीम इंडिया के ऐसे स्टार जो कभी कैमरे के सामने नहीं आया पर बड़े-बड़े खिलाड़ी उसका नाम लेते नहीं थकते। ये कहानी है टीम इंडिया के थ्रो डाउन स्पेशिलिस्ट रघु राघवेंद्र की। 16 साल से टीम इंडिया के साथ

25 जनवरी 2025 को गुवाहाटी में भारत और न्यूजीलैंड के बीच मैच खेला जा रहा था। बीते कई महीनों से अपने फॉर्म में वापस आने के लिए जूझ रहे सूर्यकुमार यादव उस मैच में वापसी करते हैं और 82 रन की मैच विनिंग पारी खेलकर टीम इंडिया को जीत दिलाते हैं। मैच जिताने के बाद डगआउट में जाते समय सूर्यकुमार यादव ने एक शख्स के पैर छुते हैं। भारतीय कप्तान ने जिस शख्स के पैर छुए वो कोई और नहीं बल्कि टीम इंडिया के थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट राघवेंद्र द्विवेदी थें। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई लोगों ने पहली बार रघु के बारे में जाना था। पर रघु, टीम इंडिया के साथ पिछले 16 साल से जुड़े हैं। शमशान पर गुजारी रात पर नहीं छोड़ा सपना

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ा जिले के कुमटा कस्बे निवासी एक शिक्षख के घर में जन्मे रघु राघवेंद्र करोड़ों भारतीय की तरह क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन हालात और हादसे ने उनके सपने को तोड़ दिया। उन्होंने हार नहीं मानी और सपने के पीछे भागते रहे। पिता के मना करने के बावजूद रघु क्रिकेट से दूर नहीं रह पाते थे। इसी उधेड़बुन में रघु ने एक बैग कुछ कपड़े और जेब में मात्र 21 रुपये लेकर रघु कुमटा से सीधे हुबली आ गए। वहां उनके पास न रहने की जगह थी ने पेट भरने के लिए पैसे। जानकारी के मुताबिक, वो शुरुआत में हुबली बस स्टैंड पर ही सोएलेकिन वहां से 10 दिन में ही पुलिस ने उनका बोरिया बिस्तर उठ गया। अंत में उनका सहारा बना एक शमशान। और इसी शमशान को उन्होंने अपना ठीकाना बना लिया। इसी दौरान उनका दायां हाथ भी टूट गया, लेकिन रघु ने हार नहीं मानी और घर लौटने से मना कर दिया। क्रिकेट से कभी नहीं बनाई दूरी

हुबली में ही वो दूसरे क्रिकेटर्स को बोलिंग प्रैक्टिस कराने लगे, फिर एक दोस्त के कहने पर बेंगलुरू गए। बेंगलुरू में कर्नाटक क्रिकेट इंस्टीट्यूट में दूसरे क्रिकेटर्स को प्रैक्टिस कराते हुए वे पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ से मिले। श्रीनाथ ने उन्हें कर्नाटक रणजी टीम का हिस्सा बनया और फिर नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में बिना किसी सैलरी के तीन चार साल काम करते रहे। एनसीए में ही उन्होंने बीसीसीआई का लेवल-1 का कोचिंग कोर्स पूरा किया। इसके बाद वे एनसीए में भारतीय खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराने लगे। सचिन से लेकर वैभव सूर्यवंशी तक का सफर

साल 2011 में सचिन तेंदुलकर की निगाह उन पर पड़ी। सचिन ने बिना देर किए रघु को भारतीय क्रिकेट के स्टाफ का हिस्सा बना लिया और तब से लेकर आज तक टीम इंडिया के साथ जुड़े हैं। राघवेंद्र द्विवेदी उर्फ रघु पिछले 15-16 सालों से टीम इंडिया की ड्रेसिंग रूम का अहम हिस्सा हैं। कई खिलाड़ी आए और गए, लेकिन बीसीसीआई ने उनपर भरोसा कायम रखा। 16 साल पहले रघु सचिन तेंदुलकर को बैटिंग प्रैक्टिस कराते थे और अब 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को भी बैटिंग अभ्यास करा रहे हैं।

रघु की तारीफ करते हुए एक बार विराट कोहली ने कहा था, पिछले कुछ सालों से टीम इंडिया के बल्लेबाज आसानी से तेज गेंदबाजों का सामना कर पा रहे हैं। हमारे बल्लेबाज विदेश में जाकर तेज गेंदबाजों को अच्छे से खेल पा रहे हैं, क्योंकि रघु हमारे साथ हैं। वो 140-150 KMPH की रफ्तार से थ्रोडाउन कराते हैं और लगातार ऐसा करते हैं।

टीम इंडिया ने जब 17 साल बाद बारबाडोस के किंग्स्टन ओवल स्टेडियम में टी20 वर्ल्ड कप जीता तो जितनी तारीफ खिलाड़ियों की हो रही थी उतनी ही तारीफ टीम इंडिया के खिलाड़ी, रघु की कर रहे थे।

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