कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट राकेश हंडू ने ULC के धमकी भरे पोस्टर को शेयर करते हुए PMO और MHA को टैग किया

0
1

आतंकी संगठन ULC के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा की भी मांग श्रीनगर प्रेस कॉलोनी में बुधवार (09 सितंबर) को कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने सुरक्षित सरकारी आवास की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. इसके कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए धमकी दी गई. इसमें इन सुरक्षित आवासों (ट्रांजिट कॉलोनियों) को ‘बसावट का इज़राइली मॉडल’ और ‘राज्य के भीतर राज्य’ बताया गया है. ये धमकी आतंकी संगठन ULC ने दी है. 

कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट राकेश हंडू ने धमकी भरा पोस्टर शेयर करते हुए PMO और MHA को टैग किया. उन्होंने दावा किया कि पोस्ट में इस्तेमाल की गई हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीर 9 सितंबर को लाल चौक पर कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन की है, जिस पर AK-47 बंदूक की तस्वीर सुपरइम्पोज (ऊपर से लगाई) की गई है.

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को MHA समर्थित प्रदर्शनकारी कहा

आतंकी संगठन ULC, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने लश्कर का प्रॉक्सी बताया है, द्वारा जारी धमकी भरे पत्र में PM पैकेज के तहत काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को ‘व्हाइट-कॉलर आतंकवादी प्रवासी पंडित’ और ‘MHA-समर्थित प्रदर्शनकारी’ कहा गया है और उन्हें खत्म करने की धमकी दी गई है.

ULC ने सभी कर्मचारियों की पूरी जानकारी का किया दावा

धमकी यहीं खत्म नहीं हुई. ULC ने कर्मचारियों के लिए बने ट्रांजिट आवासों को ‘बसावट का इज़राइली मॉडल’ और ‘राज्य के भीतर राज्य’ बताते हुए उन्हें निशाना बनाने की धमकी दी है. साथ ही कहा है कि उनके पास सभी कर्मचारियों की पूरी जानकारी है और भारत सरकार उनकी सुरक्षा नहीं कर पाएगी.

पोस्ट में कहा गया, “हमारे पास उनकी जानकारी, ठिकाने, पारिवारिक संबंध और रोज़मर्रा की गतिविधियों का विवरण है. हम जब चाहें उन पर हमला कर सकते हैं. श्मशान घाट तक को तहस-नहस कर दिया जाएगा. MHA या दिल्ली उनकी सुरक्षा नहीं कर पाएगी.”

ULC की धमकी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने इस नई धमकी भरी पोस्ट के अस्तित्व की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है, क्योंकि भारत में आतंकवाद के समर्थकों के ज़्यादातर हैंडल हटा या ब्लॉक कर दिए गए हैं, फिर भी यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) की धमकी के पीछे की रणनीतिक चालों को देखते हुए इंटेलिजेंस और सुरक्षा नेटवर्क को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

ULC के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की मांग

कश्मीरी पंडित नेता 10 सितंबर के उस धमकी भरे पत्र, (जिसमें तस्वीरें और AK-47 की धमकी शामिल है) के लिए ULC के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. वे इसे 1990 जैसा डर पैदा करने की कोशिश बता रहे हैं. साथ ही, वे तुरंत सिक्योरिटी ऑडिट और उन कर्मचारियों को सुरक्षा देने की मांग कर रहे हैं जिनकी तस्वीरें धमकी भरे पत्र में प्रकाशित की गई हैं. 

आतंकवादियों तक कैसे पहुंचा डेटा- राकेश हंडू

एक्टिविस्ट राकेश हंडू ने कहा, “हमें डेटा लीक की जांच करनी होगी. राहत आयुक्त, शिक्षा विभाग, ट्रांजिट कैंप का डेटा आतंकवादियों तक कैसे पहुंचा? हमारा डेटा कौन बेच रहा है?” उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर में सभी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को ज़ेवान, वेसू, बारामूला और कुलगाम में सुरक्षित ट्रांजिट फ्लैट तुरंत दिए जाएं.

फ्लैटों के आवंटन न होने से किराए पर रहने की मजबूरी!

श्रीनगर में गुरुवार को बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया और 29 बहुमंजिला इमारतों में बने 920 फ्लैटों के आवंटन की मांग की. हालांकि ये इमारतें रहने के लिए लगभग तैयार हैं, लेकिन सरकार से आवंटन आदेश न मिलने के कारण कर्मचारी आम रिहायशी इलाकों में किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि वहां उनकी पहचान उजागर हो सकती है और उन पर हमला हो सकता है.

राकेश हंडू ने पीएम और गृहमंत्री पर उठाए सवाल

राकेश हंडू ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से सवाल करते हुए कहा, “ये बच्चे ‘व्हाइट-कॉलर आतंकवादी’ नहीं हैं. ये उन लोगों की संतानें हैं, जिन्होंने 1990 में 7 लाख कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का सामना किया था. ये अच्छी तरह से पढ़े-लिखे हैं और भारत या विदेश में कहीं भी काम कर सकते थे. इन्होंने अपनी मातृभूमि कश्मीर की सेवा करना चुना.” 

हंडू ने आगे कहा कि उन्हें ‘श्मशान घाट को उलट-पुलट कर देने’ की धमकी के साये में क्यों रहना पड़ रहा है? अगर सरकार उन 6000 कर्मचारियों की सुरक्षा नहीं कर सकती जिनका डेटा और तस्वीरें आतंकवादियों के पास हैं, तो 7 लाख पंडितों की वापसी के आपके वादे पर कौन भरोसा करेगा? 

LEAVE A REPLY