कहते हैं कि सफलता पाने के लिए त्याग और समर्पण का होना बेहद जरुरी होता है।

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कहते हैं कि सफलता पाने के लिए त्याग और समर्पण का होना बेहद जरुरी होता है। इसका परफेक्ट उदाहण है राजस्थान के शाम सुंदर बिश्नोई की कहानी। इनकी कहानी किसी फिल्म की स्टोरी से कम नहीं है। इन्होंने ना सिर्फ बड़े अधिकारी बनाने का सपना देखा, बल्कि अपनी मां के ख्वाबों को पूरा करने के लिए ना जाने कितने त्याग किए। ये त्याग मामूली नहीं थे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के मैदान में जब श्याम सुंदर उतरे थे, तो कई बार सफलताएं हासिल हुई, लेकिन इनको अपनी मां का सपना पूरा करना था। इसलिए कई सरकारी नौकरियों को छोड़ दिया। आखिरकार आरएएस परीक्षा पास कर वो एसडीएम बनें। हालांकि आएएस की परीक्षा में वो 11 बार असफल हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ऐसे में इनकी कहानी सिर्फ आरएस परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि जिद और जुनून की भी कहानी है, जिससे लाखों छात्र इन प्रेरित हो रहे हैं।

कौन हैं श्याम सुंदर बिश्नोई

राजस्थान के रहने वाले श्याम सुंदर बिश्नोई एक छोटे गांव से ताल्लुक रखते हैं। यहीं उनका बचपन बीता। उनके पिता किसान हैं। इसके अलावा पशुपालन का भी काम करते हैं। पढ़ाई की बात करें, तो उन्होंने गांव से ही अपनी शुरुआती पढ़ाई की। 12वीं के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। दिलचस्प बात ये थी, वो वो अपने परिवार के पहले ग्रेजुएट सदस्य भी बनें। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि पढ़ाई के दम पर जिंदगी बदलनी है। साथ ही मां भी मां का भी सपना था कि उनका बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बने। ऐसे में बेटे की पढ़ाई के लिए मां-बाप ने कोई सर नहीं छोड़ी। यही सपना धीरे-धीरे श्याम की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया। उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और पूरी मेहनत इसी लक्ष्य को हासिल करने में लगा दी।

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