मौर्य ने सपा द्वारा अपनी छात्र सभा के लिए नये ‘ड्रेस कोड’ के लिए

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यूपी के उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) की लाल टोपी और छात्र शाखा में नीला परिधान अपनाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि यह ‘काली करतूतों’ को ढकने का नया प्रयास है। उप मुख्‍यमंत्री मौर्य ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के अपने आधिकारिक हैंडल पर सपा का नाम लिए बिना एक पोस्‍ट में कहा, ‘लाल टोपी, नीला लिबास-काली करतूतें ढकने का नया प्रयास! नीले रंग को चुने जाने और पहले से ही ‘लाल टोपी’ धारण करने पर यह प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और शुक्रवार को बसपा प्रमुख मायावती ने भी सपा पर तीखा प्रहार किया था। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को विपक्षी दलों खासतौर पर समाजवादी पार्टी पर अपनी पार्टी के परंपरागत नीले रंग को अपनाने को लेकर तंज कसते हुए कहा कि ‘इससे न तो इनकी संकीर्ण सामंती सोच बदलने वाली और न ही ये लोग दिल से आंबेडकरवादी होने वाले हैं।’

अखिलेश यादव ने की थी घोषणा

सपा प्रमुख और पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को घोषणा की थी कि पार्टी की छात्र इकाई ‘छात्र सभा’ ने नीली टी-शर्ट और जींस को नये ‘ड्रेस कोड’ के तौर पर अपनाया है। यादव ने सपा ‘छात्र सभा’ के नये ‘ड्रेस कोड’ के लिए नीले रंग को चुने जाने के पीछे की वजह बताते हुए कहा था कि नीला रंग विचारधारा, लोकतंत्र, संविधान, आकाश, ‘बहुजन समाज’ और बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़ा हुआ है। इससे पहले, सपा ‘छात्र सभा’ के कार्यकर्ता लाल शर्ट या कुर्ता पहनते थे।

क्या बोले थे अखिलेश

चार दिन पहले लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अखिलेश ने कहा था कि ‘छात्र सभा’ न केवल छात्रों को सदस्य के रूप में जोड़ने के लिए उनसे संपर्क करेगी, बल्कि उन्हें सपा की विचारधारा और समाजवादी मूल्यों से भी अवगत कराएगी। उन्होंने कहा, नई पीढ़ी की नई सोच है, इसलिए नई वर्दी भी होनी चाहिए। ‘छात्र सभा’ के हमारे कार्यकर्ता नीली टी-शर्ट और जींस वाली नयी वर्दी पहनकर छात्रों और युवाओं के बीच जाएंगे तथा उन्हें पार्टी से जोड़ेंगे। अखिलेश ने बताया कि दो हफ्ते का छात्र जागरूकता अभियान भी आयोजित किया जाएगा, जिसके तहत ‘छात्र सभा’ के कार्यकर्ता विश्वविद्यालयों, कॉलेज और छात्रावासों का दौरा करेंगे। उन्होंने बताया था, कार्यकर्ता न केवल छात्रों को ‘छात्र सभा’ का सदस्य बनाएंगे, बल्कि समाजवादी पार्टी की विचारधारा भी उन तक पहुंचाएंगे और उन्हें समझाएंगे कि वे पार्टी से कैसे जुड़ सकते हैं। अरुण चट्ठा

दूसरों के पहचान पत्र से सिम कार्ड हासिल करने के मामले पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। यहां से मोबाइल नंबर से जुड़ीं 32 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से करीब 16 लाख लोगों की आईडी का गलत इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी किए गए। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में का नंबर आता है। दूरसंचार विभाग से जुड़े एक अधिकारी कहते हैं कि शुरुआत में मोबाइल नंबर सिर्फ आधार या दूसरी कोई आईडी लेकर जारी कर दिए जाते थे। ऐसे में काफी बड़ी संख्या में लोगों ने किसी दूसरे की आईडी लेकर मोबाइल नंबर को जारी कर लिया। ऐसे नंबर साइबर ठगी व अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए हासिल किए गए।

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