रायबरेली : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार आज राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनपद न्यायालय रायबरेली में मा० अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण/जनपद न्यायाधीश अमित पाल सिंह की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें कुल 1,98,228 वाद निस्तारित किये गये। राष्ट्रीय लोक अदालत में वादकारियों के मध्य सुलह-समझौते के आधार पर लंबित मामलों को निपटाने व आमजन को सुलभ व सुगम न्याय उपलब्ध कराने हेतु राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है।
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय भूपेन्द्र राय, चेयरमैन-मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण प्रफुल्ल कमल, अपर प्रधान न्यायाधीश सुशील कुमार वर्मा, प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार-पंचम, नोडल अधिकारी लोक अदालत विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी0 एक्ट प्रतिमा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पवन कुमार सिंह व अन्य न्यायिक अधिकारीगण व विभिन्न बैंक के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्रीमती अनिशा ने बताया की राष्ट्रीय लोक अदालत में एक लाख अठानवे हजार दो सौ अट्ठाइस मुकदमे निपटाये गये, तथा कुल समझौते की धनराशि 21,66,19,650/- से अधिक की रही। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंकों व फाइनेंस कंपनियों के प्री-लिटिगेशन स्तर पर मामले निस्तारित कराये गये तथा मौके पर ही समझौते कराये गये।
इस लोक अदालत में अन्य मामलों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ई-चालान के मामले, चेक बाउंस (एन0आई0एक्ट) के मामले तथा वैवाहिक विवाद के मामले निस्तारित किये गये। तलाक के मुहाने पर खड़े कई जोड़ों का सुलह-समझौता कराकर वापस भेजा गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला कारागार रायबरेली में बंदियों द्वारा बनाई गई सामग्री की प्रदर्शनी, स्वास्थ्य विभाग का स्टाल, दिव्यांगजन विभाग का स्टाल व एक जिला एक उत्पाद के स्टाल/प्रदर्शनी दीवानी न्यायालय में प्रदर्शित की गयी। आमजन की सहायता के लिए न्यायालय परिसर में कई जगह सहायता पटल व हेल्प डेस्क बनाये गये।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में बिखरता परिवार फिर हुआ एक, तलाक की दहलीज से लौटकर साथ रहने का लिया फैसला
रायबरेली: राष्ट्रीय लोक अदालत के मंच पर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, रायबरेली के समक्ष एक अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायी मामला सुलझा, जहां आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल कर चुके पति-पत्नी ने गिले-शिकवे भुलाकर फिर से साथ रहने का फैसला किया।
प्रमुख बिंदु:
मामला: प्रवीन कुमार बनाम श्रीमती शान्ती गुप्ता उर्फ पूर्णिमा गुप्ता (वाद सं. 1588/2025, अंतर्गत धारा 13-B हिन्दू विवाह अधिनियम)।
विवाद की वजह: दंपती का विवाह 16 दिसंबर 2023 को हुआ था। विवाह के बाद उनके बच्चे की गंभीर बीमारी के कारण असामयिक मृत्यु हो गई, जिसके दुख और मानसिक तनाव के चलते दोनों में मतभेद गहरे हो गए और वे अलग रहने लगे।
तलाक की नौबत: सामाजिक व पारिवारिक सुलह के प्रयास विफल होने पर दोनों ने आपसी सहमति से विवाह विच्छेद (तलाक) का वाद न्यायालय में दायर कर दिया था।
लोक अदालत में सुलह: राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की गहन काउंसलिंग कराई गई और उन्हें अपने मतभेद भुलाकर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया गया।
न्यायालय के संवेदनशील प्रयासों के चलते दंपती ने अंतिम रूप से अपना सुलहनामा प्रस्तुत करते हुए अदालत को अवगत कराया कि वे पुरानी कड़वाहट भूलकर पुनः साथ-साथ दांपत्य जीवन व्यतीत करेंगे। इस तरह राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से न केवल एक पुराना विवाद समाप्त हुआ, बल्कि एक टूटता हुआ आशियाना भी बच गया।
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