इस्तीफे के अलावा और भी मांगें
मालूम हो कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इलेक्शन कमीशन में कामकाज में कथित अनियमितताओं, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर भी हो रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने रविवार को लगातार तीसरे दिन विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस पर जमकर हमला बोला। नेहा ने कहा है कि हम कोई कुत्ते, कॉकरोच और कीड़े मकोड़े नहीं हैं। नेहा का दावा है कि उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद नरेला इंडस्ट्रियल एरिया थाने से रिलीज किया गया।
नेहा ने हिरासत से रिहा किए जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो शेयर कर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा ‘6 बजकर 13 मिनट हो रहे हैं और मुझे नरेला इंडस्ट्रियल एरिया थाना से रिलीज कर दिया गया है। इन्हें लगता है कि हम कुत्ते हैं कॉकरोच हैं। हमें पकड़कर कहीं भी फेंक दो, मारो और गाड़ी में घुसा कर 50 किलोमीटर दूर हिरासत में ले लो। लेकिन आज आपने ये दिखाया कि हम कुत्ते नहीं हैं, कॉकरोच नहीं है और कीड़े मकोड़े नहीं बल्कि इस देश के नागरिक हैं।’ आइसा अध्यक्ष ने आगे कहा ‘इस देश के नागरिकों को अधिकार है कि सत्ता में बैठे लोगों से सवाल भी पूछो। जो वोट वो देते वो कहां जाता है उसका क्या सौदा करती है ईसीआई (इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया) और सत्ताधारी पार्टी? ये पूछना भी हमारा अधिकार है और जब हमारे पहले से तय प्रोटेस्ट साइट से हमें प्रोटेस्ट करने पर बार-बार डिटेन कर लिया जाता है और मारा-पीटा जाता है तो वहां पर बार-बार आकर के उस पब्लिक प्लेस पर अपनी दावेदारी दर्ज करना ये भी हमारा अधिकार है।’ पुलिस बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गई थीं नेहा
आपको बता दें कि आइसा के सदस्यों ने दावा किया था कि जंतर-मंतर की ओर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था। हिरासत में लिए जाने से पहले नेहा बोरा पुलिस बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़ गई थीं और इस दौरान भी आक्रमक अंदाज देखने को मिला था। वे पुलिस की कार्रवाई से खासा नाराज नजर आई थीं। आपको बता दें कि प्रदर्शन कर रहे अन्य लोगों को भी अलग-अलग थानों पर ले जाया गया इस्तीफे के अलावा और भी मांगें
मालूम हो कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इलेक्शन कमीशन में कामकाज में कथित अनियमितताओं, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर भी हो रहे हैं।
































































