दोनों देशों के बयानों को ध्यान से देखों तो एक महीन अंतर दिखता

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चीन चाहता है कि सीमा विवाद को लंबित रखते हुए भी India-China: गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक संघर्ष के करीब सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति भारत आए थे। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान यहां उन्होंने ब्रक्स शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी हुई। बैठक में सीमा विवाद को सुलझाने पर सहमति बनती दिखी। हालांकि, इसके बाद जब दोनों देशों के द्वारा आधिकारिक बयान जारी किए गए तो उनमें विरोधाभास दिखा। चीन का क्या है बयान?

चीन ने अपने बयान में दोनों देशों से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने का आह्वान किया। ड्रैगन ने कहा कि उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखते हुए दोनों मोर्चों पर समानांतर और पारस्परिक रूप से मजबूत प्रगति की तलाश करनी चाहिए। इसका मतलब यह हुआ कि चीन चाहता है कि सीमा विवाद सुलझने का इंतजार किए बिना अन्य क्षेत्रों में संबंध सामान्य किए जाएं। भारत ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए एक आवश्यक आधार बनी हुई है। उन्होंने दोनों देशों को सीमा संबंधी मुद्दों पर मौजूदा समझौतों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत की तरफ से जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा से जुड़े मुद्दों को निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक तरीके से हल करने पर प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का साफ कहना है कि सीमा संबंधी मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए।

चीन और भारत के बयान में क्या अंतर?

दोनों देशों के बयानों को ध्यान से देखों तो एक महीन अंतर दिखता है। चीन चाहता है कि सीमा विवाद को लंबित रखते हुए भी बाकी संबंधों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं भारत का रुख 2020 गलवान झड़प के बाद से बिल्कुल साफ है। भारत का कहना है कि जब तक सीमा पर पूर्ण शांति स्थापित नहीं होती और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति सामान्य नहीं होती तब तक द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य विकास संभव नहीं है। भारत चाहता है कि सीमा शांतिपूर्ण रहनी चाहिए और मौजूदा समझौतों का पालन किया जाना चाहिए।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और सम्मेलन की सफलता में उनके योगदान की सराहना की। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की ताकत से सीखकर साझा विकास हासिल कर सकते हैं। उन्होंने ब्रिक्स सहयोग को बढ़ाने के लिए साथ चलने का भी आह्वान किया।

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