रायबरेली। राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में समाजवादी पार्टी की पीडीए महापंचायत के आयोजन के बाद जिले की सियासी हलचल तेज हो गई है। शहर के जहानाबाद क्षेत्र स्थित एक निजी लॉन में आयोजित महापंचायत में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ सपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की खास चर्चा इसलिए भी रही क्योंकि रायबरेली सदर से कई बार विधायक रहे स्वर्गीय अखिलेश सिंह की बहन पूनम सिंह ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद पहली बार पार्टी के बैनर तले बड़े राजनीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया।
महापंचायत में बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक पहुंचे। मंच पर सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के जरिए पूनम सिंह ने रायबरेली में अपनी राजनीतिक सक्रियता और संगठनात्मक भूमिका का भी स्पष्ट संदेश दिया।
मुख्य अतिथि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों की राजनीति कर रही हैं। उन्होंने सरकारी संस्थानों और विभागों को उद्योगपतियों को सौंपे जाने का आरोप लगाते हुए दलितों और ब्राह्मणों के उत्पीड़न का भी मुद्दा उठाया।
सिद्दीकी ने कहा कि संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है और “जब तक संविधान है, तब तक हम लोग हैं।” उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि चुनाव नजदीक आने पर कांग्रेस समेत अन्य दलों के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का प्रमुख लक्ष्य भाजपा को सत्ता से बाहर करना होना चाहिए।
वहीं, पूनम सिंह ने महापंचायत को संबोधित करते हुए वर्ष 2027 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने का दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीडीए की भागीदारी निर्णायक होगी और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने में पीडीए की बड़ी भूमिका रहेगी।
रायबरेली सदर की राजनीति में पूनम सिंह की सक्रियता के लिहाज से भी यह महापंचायत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समाजवादी पार्टी का दामन थामने के बाद उनके द्वारा आयोजित इस बड़े कार्यक्रम ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है। खास तौर पर सदर विधानसभा क्षेत्र में उनके राजनीतिक कदम पर अब सियासी नजरें टिक गई हैं।






























































