UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद अगस्त में भारत में चलन वाली नकदी 12.5% बढ़कर 42.86 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई. देश में UPI और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. छोटी से छोटी चीज के लिए लोग मोबाइल निकालकर QR कोड स्कैन कर देते हैं. चाय-पानी से लेकर किराने का सामान और बिजली बिल तक, कई जगह पर कैश की जगह UPI से ही पेमेंट किया जाने लगा है. लेकिन मजे की बात ये है कि यूपीआई के इस दौर में भी कैश सर्कुलेशन लगातार बढ़ रही है.
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के अंत तक देश में चलन में नकदी बढ़कर 42.86 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है. सालाना कैश सर्कुलेशन में 12.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
UPI के समय में कैश क्यों बढ़ रहा?
अब लोगों के मन में तो आएगा ही कि जब हर जगह यूपीआई का इस्तेमाल हो रहा है तो फिर लोगों के पास कैश इतना ज्यादा क्यों है? दरअसल, डिजिटल पेमेंट और कैश का इस्तेमाल एक-दूसरे को पूरी तरह खत्म नहीं कर रहे हैं. लोग अपनी जरूरत के हिसाब से कैश या यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं.
RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने भी कहा है कि डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद ग्रामीण और शहरी इलाकों, कम आय वाले लोगों, बुजुर्गों और छोटे कारोबारियों कैश इस्तेमाल करते ही हैं.
यूपीआई नहीं इस्तेमाल कर रहे लोग?
कैश बढ़ने का मतलब ये नहीं है कि लोग UPI से दूरी बना रहे हैं. दरअसल, अगस्त में UPI ट्रांजेक्शन की संख्या सालाना आधार पर 22.5 फीसदी बढ़ी है, जबकि ट्रांजेक्शन की टोटल वैल्यू में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यानी एक तरफ लोग डिजिटल पेमेंट ज्यादा कर रहे हैं और दूसरी तरफ नकद भी खर्च कर रहे हैं.
UPI पर MDR का क्या असर पड़ेगा?
कैश की मांग बढ़े का आंकड़ा भी तब आया है जब 2000 से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR लागू होने की खबर चर्चा में है. इसका मतलब ये है कि कुछ बड़े UPI पेमेंट पर मर्चेंट को लागत का सामना करना पड़ सकता है. इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि क्या बड़े कारोबारी पेमेंट में दोबारा कैश ही लेंगे.
‘एबीपी नेटवर्क’ में सीनियर कॉपी-एडिटर के तौर पर काम कर रहीं सृष्टि का डिजिटल मीडिया में 4 सालों से अधिक का अनुभव है.बिजनेस, एंटरटेनमेंट, धर्म, लाइफस्टाइल और यात्रा सेक्शन में लेखन, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है.सीसीएसयू से मास कम्युनिकेशन में स्नातक कर चुकीं सृष्टि ने अपने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स के साथ की थी, जिसके बाद वो 2.5 साल तक टाइम्स नाउ नवभारत का हिस्सा भी रहीं.फाइनेंस के साथ फिल्मी कीड़ा होना न केवल इनका पेशा बल्कि हिस्सा है





























































