बड़े दुकानदार यह फीस अपने ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकते हैं.
उदाहरण-1: रमेश सेठ की किराने की दुकान है. आपने सुबह 500 रुपए का सामान लिया और यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस(UPI) से पेमेंट कर दिया. शाम को 1,200 रुपए और रात में 1,800 रुपए का राशन लिया. सभी पेमेंट UPI से हुए. यह तीनों पेमेंट 2 हजार रुपए से कम थे यानी तीनों सिक्योर कैटेगरी में आते हैं. आपसे एक रुपया भी एक्स्ट्रा नहीं कटा. रमेश सेठ से एक रुपया नहीं कटा. सब कुछ पहले जैसा ही है.
उदाहरण-2: आपने एक मोबाइल शोरूम से 45,000 रुपए का फोन खरीदा और UPI से पेमेंट कर दिया. यह 2 हजार रुपए से ऊपर था, इसलिए यह उस कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर है, जो 2 हजार रुपए तक के लेनदेन को मिली हुई है. हालांकि अभी भी आपसे कोई चार्ज नहीं कटा. शोरूम वाले से भी कोई चार्ज नहीं कटा, क्योंकि सरकार ने 2 हजार रुपए से ऊपर के UPI पेमेंट पर अभी कोई फीस तय ही नहीं की है.
तो फिर बदला क्या है?
सिर्फ इतना कि 2 हजार रुपए से ऊपर के UPI पेमेंट को पहले वाली कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है. यानी आगे चलकर इन पर फीस लगाने का रास्ता खुल गया है. फीस लगेगी या नहीं, कितनी लगेगी और किस पर लगेगी, यह फैसला NPCI की अगुवाई वाली कमेटी करेगी.
नया नियम आखिर है क्या?
नए नोटिफिकेशन में सरकार ने दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम तय किए हैं, जिन पर चार्ज नहीं लगाया जा सकता:
- RuPay डेबिट कार्ट से किया गया पेमेंट.
- 2 हजार रुपए तक का UPI लेनदेन.
नोटिफिकेशन के मुताबिक, बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर इससे पैसा भेजने या लेने पर किसी व्यक्ति से सीधे या किसी दूसरे तरीके से कोई चार्ज नहीं ले सकता. यही से 2 हजार रुपए की सीमा अहम हो जाती है, क्योंकि इससे ज्यादा के UPI पेमेंट अब इस खास कानूनी सुरक्षा के दायरे में नहीं आते.
यह नोटिफिकेशन क्यों आया?
यह नोटिफिकेशन अचानक नहीं आया है. इसकी जड़ें अगस्त 2026 में पारित उस कानून से जुड़ी हैं, जिसने सरकार को डिजिटल पेमेंट पर फीस लगाने और हटाने का अधिकार दिया है. संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास किया था, जिसके जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10ए में बदलाव किया गया. इसके बाद से ही 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर फीस लगने की अटकलें शुरू हो गई थीं.
क्या 2 हजार रुपए से ऊपर UPI करने पर अभी फीस लगेगी?
नए नोटिफिकेशन में 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर कोई नई फीस तय नहीं की गई है. यानी अगर आप 5,000 या 10,000 रुपए का UPI पेमेंट करते हैं, तो सिर्फ इस नोटिफिकेशन की वजह से आपके खाते से कोई चार्ज नहीं कटेगा.
अभी सिर्फ इतना हुआ है कि सरकार ने बड़े UPI पेमेंट पर फीस लगाने की संभावना के लिए कानूनी रास्ता खोल दिया है. फीस लगेगी या नहीं, कितनी लगेगी और किस तरह वसूली जाएगी, इस पर अभी अंतिम फैसला होना
. इसका नतीजा यह हुआ कि UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है. यह 11 देशों में लाइव है. जीरो MDR का एक बड़ा नुकसान भी था. बैंक, NPCI और फिनटेक कंपनियों को ट्रांजैक्शन से कुछ नहीं मिलता था. सरकार ने सब्सिडी के जरिए इसकी भरपाई की, लेकिन सवाल यह उठता रहा कि सिर्फ सब्सिडी पर निर्भर मॉडल कब तक चलेगा.
2000 की लिमिट ही क्यों चुनी गई?
2 हजार रुपए की लिमिट चुनने के पीछे 3 बड़ी वजहें हैं:
- आम आदमी के रोजमर्रा के लेनदेन का औसत: भारत में UPI से होने वाले ज्यादातर लेनदेन छोटी रकम के होते हैं. किराने का सामान, सब्जी, चाय और ऑटो का किराया जैसे खर्चे 2 हजार रुपए से कम के ही होते हें. इस वजह से आम आदमी के रोजमर्रा के ज्यादातर लेनदेन इ सुरक्षा के दायरे में बने रहेंगे.
- सरकार की सब्सिडी का दायरा: सरकार पहले से ही 2 हजार रुपए से कम के UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर सब्सिडी देती आ रही है. बजट 2026-27 में इसके लिए 2 हजार रुपए करोड़ का प्रावधान किया गया था. यह सब्सिडी सिर्फ कम वैल्यू के ट्रांजैक्शन पर लागू होती है. यानी 2 हजार रुपए की सीमा पहले से ही सरकार की सब्सिडी व्यवस्था का हिस्सा रही है.
- बड़े कारोबारी लेनदेन पर फोकस: 2 हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन अक्सर बड़े कारोबारियों से जुड़े होते हैं, जैसे शोरूम, बड़े रिटेलर और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें. सरकार का मानना है कि अगर कहीं फीस लगाई जाती है तो वह इन्हीं बड़े लेनदेन पर होनी चाहिए, न कि छोटे दुकानदारों और आम आदमी पर.
तो क्या इसके लिए ग्राहक से पैसे लिए जाएंगे?
सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगर UPI पर कोई फीस आती भी है, तो उसका बोझ ग्राहक पर डालने की बात नहीं है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा है कि UPI पेमेंट पर ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा और पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे.
फीस MDR के रूप में दुकानदार या कारोबारी से ली जा सकती है.
मान लीजिए, आपने किसी दुकान पर UPI से 5 हजार रुपए का पेमेंट किया. अगर भविष्य में उस तरह के लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है, तो फीस ग्राहक से नहीं बल्कि पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी से
क्या हर 2 हजार रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर फीस लगेगी?
अभी ऐसा तय नहीं हुआ है. सरकार की ओर से कहा गया है कि अगर फीस लगाई जाती है, तो यह एक तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा कारोबारी लेनदेन पर होगी. P2P को भेजे जाने वाले UPI पैसे को पूरी तरह मुफ्त रखने की बात भी कही गई है. अभी यह कहना सही नहीं होगा कि कल से 2,001 रुपए का UPI करने पर फीस लग जाएगी. फीस का ढांचा अभी तय नहीं हुआ है.
सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?
इसका जवाब समझने के लिए आपको पर्दे के पीछे के आंकड़े देखने होंगे.
सरकार का तर्क है कि UPI सिस्टम को चलाने, उसकी सुरक्षा बनाए रखने और नई तकनीक पर लगातार खर्च होता है. UPI के बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के साथ साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकथाम और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार अपग्रेड की जरूरत पड़ती है.
सरकार का कहना है कि सिर्फ सब्सिडी पर निर्भर रहना UPI के अगले दौर के विकास के लिए टिकाऊ नहीं है. एक ऐसा मॉडल चाहिए जिससे UPI खुद अपना खर्च निकाल सके और मजबूत बना रहे.
अब आंकड़ों पर नजर डालिए. पेमेंट कंपनियों का अनुमान है कि UPI को चलाने की सालाना लागत करीब 20,700 करोड़ रुपए है. सरकार की तरफ से सब्सिडी के तौर पर सिर्फ 2 हजार रुपए करोड़ का प्रावधान है. यानी सरकारी सब्सिडी इंडस्ट्री की असल लागत का सिर्फ 11 प्रतिशत ही कवर कर रही है. यही असली वजह है कि सरकार MDR को वापस लाने पर विचार कर रही है.
UPI का कारोबार कितना बड़ा है?
इस पूरी बहस को समझने के लिए UPI के आकार को समझना बहुत जरूरी है. UPI को NPCI चलाता है और यह देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है.
अगस्त 2026 में UPI पर करीब 2,451 करोड़ लेनदेन हुए. इन सभी लेनदेन की कुल कीमत करीब 29.82 लाख करोड़ रुपए रही. यह UPI का अब तक का सबसे बड़ा मंथली रिकॉर्ड है. पिछले साल के मुकाबले ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 22% और वैल्यू में 20% की बढ़ोतरी हुई है. रोजाना औसतन 79.1 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं.
कितनी फीस लग सकती है?
अभी कोई अंतिम दर तय नहीं है, लेकिन इंडस्ट्री के अनुमानों पर नजर डालें तो कुछ आंकड़े सामने आ रहे हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, NPCI की अगुवाई वाली कमेटी 40 बेसिस पॉइंट्स (0.4 प्रतिशत) के MDR पर विचार कर रही है. इसे तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है. जारी करने वाले बैंक को 40 प्रतिशत, PhonePe और Google Pay जैसे ऐप प्रोवाइडर्स को 30 प्रतिशत और एक्वायरिंग बैंक को 30 प्रतिशत. यानी 40 बेसिस पॉइंट्स पर बैंक को करीब 16 बेसिस पॉइंट्स, ऐप प्रोवाइडर को 12 बेसिस पॉइंट्स और एक्वायरर को 12 बेसिस पॉइंट्स मिल सकते हैं.
कुछ रिपोर्ट्स में 25 से 40 बेसिस पॉइंट्स के बीच की बात कही गई है. वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह 5 से 7 बेसिस पॉइंट्स (0.05 से 0.07 प्रतिशत) तक भी हो सकता है.
प्रस्ताव के मुताबिक, यह MDR उन कारोबारियों पर लागू हो सकता है जिनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपए से 1.5 करोड़ रुपए के बीच है और जिनके ट्रांजैक्शन 2 हजार रुपए से ऊपर हैं. फीस सेक्टर के हिसाब से अलग-अलग भी हो सकती है.
Jefferies के अनुमान के मुताबिक, बड़े UPI लेनदेन पर दुकानदारों से फीस लेने की व्यवस्था शुरू होने पर पेमेंट इंडस्ट्री को सालाना करीब 5 हजार करोड़ रुपए से 10 हजार करोड़ रुपए तक की कमाई हो सकती है.
क्या हर बड़े दुकानदार पर लागू होगा?
ऐसा नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि MDR सिर्फ कुछ खास कैटेगरी के कारोबारियों पर लागू होगा. छोटे दुकानदार और 2 हजार रुपए से कम के लेनदेन वाले कारोबारी इस दायरे से बाहर रहेंगे. लेकिन यहीं एक बड़ी चिंता भी है कि अगर बड़े दुकानदारों पर MDR लगता है, तो क्या वे इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देंगे.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े रिटेलर और शोरूम चुपचाप कीमतों में यह फीस जोड़ सकते हैं. इससे आम आदमी को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि सरकार का कहना है कि MDR की दर इतनी कम होगी कि इसका असर कीमतों पर नहीं दिखेगा.
नोटिफिकेशन में क्या-क्या साफ नहीं है?
नए नोटिफिकेशन में 4 बातें अभी धुंधली हैं:
- इसमें इसके लागू होने की तारीख नहीं दी गई है.
- 2019 के पुराने नोटिफिकेशन को सीधे तौर पर रद्द करने की बात भी नहीं लिखी गई है.
- नए नोटिफिकेशन में P2P और पर्सन टू मर्चेंट (P2M) वाले UPI पेमेंट का अलग-अलग जिक्र नहीं है.
- 2019 के नोटिफिकेशन में BHIM UPI QR Code का अलग से नाम था, जबकि इस बार ऐसा नहीं है.
आम आदमी पर अभी क्या असर?
फिलहाल आपके UPI इस्तेमाल करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है. चाय की दुकान पर 50 रुपए देने हों, किराने का 1,500 रुपए का पेमेंट करना हो या किसी को 5 हजार रुपए भेजने हों, अभी UPI पर कोई नई फीस नहीं लगी है. अगर आप 2 हजार रुपए से ज्यादा का UPI पेमेंट करते हैं, तो भी सिर्फ इस नोटिफिकेशन की वजह से आपके खाते से पैसा नहीं कटेगा.
ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.



























































