याचिकाकर्ता सागर गवई की ओर से पेश अधिवक्ता प्रकाश आंबेडकर ने स्पष्ट किया

0
3

याचिका का दायरा सीमित है. उन्होंने हाईकोर्ट से महाराष्ट्र में मतदाताओं के नाम हटाने पर रोक लगाने की मांग की थी महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानि (SIR) के दौरान कथित प्रक्रियात्मक उल्लंघन और मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि एसआईआर में नाम नहीं काटने का आदेश नहीं दे सकते हैं, क्योंकि सु्प्रीम कोर्ट में इसको लेकर सुनवाई चल रही है और हाईकोर्ट द्वारा इस पर समानांतर सुनवाई और आदेश देना सही नहीं होगा. साथ ही इस पर सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टाल दी गई. 

वहीं सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने दलील दी कि SIR से जुड़े व्यापक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट पहले से सुनवाई कर रहा है. उन्होंने 24 नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट और राज्यों को ऐसे मामलों में समानांतर सुनवाई से रोका गया है.

एडवोकेट आशुतोष कुंभकोणी ने कहा, “यह याचिका और वह अंतरिम आदेश अभी भी लागू है. विभिन्न हाईकोर्ट और राज्यों को इन मुद्दों पर आगे बढ़ने से रोका गया है.”

याचिका में क्या कहा गया?

उधर, याचिकाकर्ता सागर गवई की ओर से पेश अधिवक्ता प्रकाश आंबेडकर ने स्पष्ट किया कि याचिका का दायरा सीमित है. उन्होंने हाईकोर्ट से महाराष्ट्र के मतदाताओं के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया और कहा कि जब तक मामले पर सुनवाई होती है, तब तक महाराष्ट्र में मतदाताओं के नाम हटाने पर रोक लगाने का निर्देश दिया जा सकता है.

‘सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी’

इस पर कोर्ट ने माना कि जिस पुराने आदेश का हवाला दिया गया है, उसमें महाराष्ट्र का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई चल रही है, इसलिए समान मुद्दे पर समानांतर सुनवाई की जरूरत नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र उसमें सूचीबद्ध नहीं है, यह सही है, लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है, तो समानांतर सुनवाई की जरूरत नहीं है. 8 अक्टूबर बहुत दूर नहीं है.

नाम नहीं काटने का आदेश नहीं दे सकते- कोर्ट

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से मांगे गए अंतरिम आदेश को भी पारित करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि हम पीआईएल की सुनवाई नहीं कर रहे हैं, यह एक रिट है. यह कैसे दिखाई देगा कि अनुरोध किए जाने के बावजूद हाईकोर्ट इस मामले में आगे बढ़ रहा है? हम नाम ना काटने जैसा कोई आदेश कैसे पारित कर सकते हैं.

LEAVE A REPLY