अगर आप भी विदेश में पढ़ाई करने का प्लान बना रहें हैं, तो पहले यह जान लें साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई और बेहतर करियर के लिए विदेश जाने का प्लान बनाते हैं. कुछ छात्र अच्छी यूनिवर्सिटी और कोर्स देखते हैं, जबकि कुछ पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसरों को ध्यान में रखते हैं. अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस भारतीय छात्रों के प्रमुख विकल्प हैं. हर देश में फीस, रहने का खर्च, वीजा और नौकरी से जुड़े नियम अलग होते हैं.
अमेरिका और ब्रिटेन में पढ़ाई के विकल्प
अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय स्टडी डेस्टिनेशन है. यहां कई बड़ी यूनिवर्सिटीज और अलग-अलग तरह के कोर्स उपलब्ध हैं. इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मैनेजमेंट, डेटा साइंस और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में छात्र पढ़ाई कर सकते हैं. अमेरिका में यूनिवर्सिटी और कोर्स के हिसाब से फीस काफी अलग होती है. रहने का खर्च भी शहर के अनुसार बदलता है.
कई संस्थानों में स्कॉलरशिप और असिस्टेंटशिप के विकल्प मिलते हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने के लिए छात्रों को अपने वीजा और वर्क परमिशन के नियमों का पालन करना होता है. ब्रिटेन भी भारतीय छात्रों के लिए एक प्रमुख विकल्प है. यहां कई मास्टर डिग्री कम अवधि में पूरी की जाती हैं. बिजनेस, फाइनेंस, कंप्यूटर साइंस और हेल्थ जैसे विषयों में कई कोर्स उपलब्ध हैं. देश चुनते समय छात्रों को कोर्स की फीस और पढ़ाई के बाद काम करने से जुड़े मौजूदा नियम जरूर देखने चाहिए.
कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी भी विकल्प
कनाडा में भारतीय छात्र अलग-अलग कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं. यहां पढ़ाई के साथ काम और आगे करियर बनाने की योजना रखने वाले छात्रों की रुचि रहती है. हालांकि स्टूडेंट परमिट और इमिग्रेशन से जुड़े नियम बदलते रहते हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी है. ऑस्ट्रेलिया में इंजीनियरिंग, आईटी, बिजनेस और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में कई कोर्स उपलब्ध हैं. पढ़ाई के दौरान काम करने और पढ़ाई के बाद रोजगार से जुड़े नियम लागू होते हैं.
वहीं जर्मनी उन छात्रों के लिए विकल्प है जो यूरोप में पढ़ाई करना चाहते हैं. यहां कई सरकारी संस्थानों में ट्यूशन फीस दूसरे देशों की तुलना में कम हो सकती है. हालांकि रहने का खर्च और दूसरे शुल्क अलग हो सकते हैं. जर्मनी में इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और रिसर्च से जुड़े कोर्स काफी लोकप्रिय हैं. अंग्रेजी माध्यम के कोर्स उपलब्ध हैं, लेकिन जर्मन भाषा सीखना नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी में मददगार रहती है.
फ्रांस में पढ़ाई के साथ नई पॉलिसी भी जानें
फ्रांस भी भारतीय छात्रों के लिए एक विकल्प है. भारत फ्रांस की एटूडेसेन् फ्रांस प्रक्रिया में शामिल देशों में है. तीन महीने से ज्यादा के कोर्स के लिए आम तौर पर लॉन्ग-स्टे स्टूडेंट वीजा की जरूरत होती है. फ्रांस में पढ़ाई के दौरान विदेशी छात्र साल में अधिकतम 964 घंटे तक नौकरी कर सकते हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ मास्टर स्तर के योग्य छात्रों के लिए नौकरी खोजने या बिजनेस शुरू करने से जुड़ी अलग व्यवस्था भी है.
2026 में फ्रांस के स्टूडेंट वीजा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है. 1 अगस्त 2026 से स्टूडेंट वीजा के लिए आर्थिक संसाधनों का न्यूनतम प्रमाण 877.50 यूरो प्रति महीने कर दिया गया है, जो पहले 615 यूरो था. यानी भारतीय छात्रों को वीजा आवेदन के समय अपनी आर्थिक क्षमता का नया मानक ध्यान में रखना होगा. इसके अलावा 1 जनवरी 2026 से फ्रांस में कुछ लंबे समय के रेजिडेंस परमिट और नागरिकता की प्रक्रियाओं में सिविक एग्जाम से जुड़ी नई शर्त लागू हुई है. यह नियम हर स्टूडेंट वीजा पर सीधे लागू नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक फ्रांस में रहने की योजना बनाने वाले छात्रों को इसकी जानकारी रखनी चाहिए.
मंदसौर, मध्यप्रदेश के दीनदयाल पाटीदार ABP न्यूज में बतौर इंटर्न कार्यरत हैं. मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे दीनदयाल की जनरल नॉलेज (GK) और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है. वह खबरों को सटीक और ज्ञानवर्धक तरीके से पेश करने का हुनर रखते हैं.




























































