डायबिटीज आंखों की दुश्मन, बढ़ाती है ग्लूकोमा के मरीजों की परेशानी

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ग्लूकोमा दुनिया में स्थायी अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है। यह आंखों की एक ऐसी बीमारी है जिसमें ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती है। शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए कई मरीज तब तक बीमारी की गंभीरता को नहीं समझ पाते, जब तक उनकी देखने की क्षमता प्रभावित नहीं हो जाती। इसके प्रभाव को कम करने के लिए डॉक्टर ग्लूकोमा के मरीजों को रोजाना की कुछ आदतों को बदलने की सलाह देते हैं।

ग्लूकोमा आंखों की एक गंभीर बीमारी है, जिसमें ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है। इस बीमारी से अंधापन होने पर व्यक्ति को कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में अक्सर इसके लक्षण महसूस नहीं होते। जब तक मरीज को धुंधला दिखाई देना या दृष्टि का दायरा कम होना महसूस होता है, तब तक आंखों को काफी नुकसान हो चुका होता है। अच्छी बात यह है कि समय पर इलाज, नियमित जांच और सही जीवनशैली अपनाकर बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है। लेकिन कई मरीज रोजमर्रा की कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उपचार के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसे में आगे जानते हैं उन गलतियों के बारे में जिनको ग्लूकोमा के मरीजों को तुरंत बदलने की सलाह दी जाती है।

ग्लूकोमा में व्यक्ति की जीवनशैली क्यों महत्वपूर्ण होती है?

एनसीबीआई के अनुसार ग्लूकोमा का इलाज केवल आई ड्रॉप्स या सर्जरी तक सीमित नहीं है। उपचार का उद्देश्य आंखों के अंदर के दबाव (Intraocular Pressure – IOP) को नियंत्रित रखना और ऑप्टिक नर्व को आगे होने वाले नुकसान से बचाना भी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मरीज दवाएं समय पर लेते हैं, नियमित जांच कराते हैं और अन्य बीमारियों जैसे हाई ब्लड प्रेशर एवं डायबिटीज को नियंत्रित रखते हैं, तो दृष्टि को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की संभावना बढ़ जाती है।

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