जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में सोमवार को भीषण ट्रैफिक जाम लगा, जिससे शहरवासियों को पांच घंटे तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ा

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जासं, जमशेदपुर। औद्योगिक नगरी जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में सोमवार को लगे भीषण ट्रैफिक जाम ने शहरवासियों की सब्र का इम्तिहान ले लिया। 

सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ जाम का सिलसिला शाम चार बजे तक ऐसा भयावह रूप ले चुका था कि मानगो पुल पर गाड़ियां जहां की तहां थम गईं। 

इसके बाद भी देर शाम तक सड़कों पर वाहनों की रफ्तार रेंगने से अधिक नहीं हो सकी। उमस भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच लगातार पांच घंटे तक जाम में फंसे लोग बेहाल नजर आए। 

स्थिति इतनी विकराल हो गई कि कई लोग अपने वाहन सड़क किनारे छोड़कर पैदल ही गंतव्य की ओर निकल पड़े। इस महाजाम का सबसे बुरा असर छोटे-छोटे स्कूली बच्चों और दूर-दराज का सफर करने वाले बस व ट्रेन यात्रियों पर पड़ा। कई स्कूलों की बसें और वैन घंटों जाम में फंसी रहीं। 

बसों के आगे न बढ़ने पर कई परेशान अभिभावक खुद वाहन से उतरे और बच्चों को सुरक्षित पैदल लेकर गए। इसके अलावा साकची, डिमना और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों की ट्रेनें व बसें छूटने का डर सताता रहा। जाम के लंबे खींचने के कारण सड़क किनारे स्थित फल, जूस, पानी और स्नैक्स की दुकानों पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और चिप्स खरीदकर अपनी भूख और प्यास मिटाते दिखे। 

इस दौरान सबसे दुखद स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की रही। मानगो पुल और आसपास के रास्तों पर करीब आधा दर्जन एंबुलेंस फंसी रहीं। मरीज को ले जा रही एंबुलेंस के लगातार सायरन बजाने के बावजूद चालकों को रास्ता देने की जगह नहीं मिल पा रही थी मानगो में लगे इस भीषण जाम का असर पूरे जमशेदपुर शहर की यातायात व्यवस्था पर साफ दिखाई दिया। ऑटो में बैठे यात्रियों ने जाम से आजिज आकर पैदल चलना ही मुनासिब समझा। 

मानगो हनुमान मंदिर से साकची, डिमना चौक से साकची और मानगो पुल से पुराना कोर्ट तक सड़कों पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। ओल्ड पुरुलिया रोड पर भी आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई, जिससे पूरी यातायात पुलिस लाचार नजर आई।

नवंबर में एक लेन चालू होने पर मिलेगी राहत: डीएसपी 

यातायात डीएसपी नीरज ने बताया कि मानगो पुल पर जाम का मुख्य कारण चल रहा फ्लाईओवर निर्माण कार्य और सड़कों पर वाहनों का अत्यधिक दबाव है। 

उन्होंने जानकारी दी कि फ्लाईओवर की एक लेन अब अक्टूबर में नहीं, बल्कि नवंबर में चालू होने की उम्मीद है, जिसके बाद ही लोगों को राहत मिल सकेगी। फिलहाल स्थिति को संभालने के लिए पुल के दोनों ओर 30 अतिरिक्त पुलिस जवानों की तैनाती की गई है।

आक्रोशित स्थानीय लोगों और अभिभावकों का दर्द 

स्थानीय निवासी बलविंदर कौर ने बताया कि घंटों फंसने के कारण उन्हें गाड़ीछोड़कर पैदल जाना पड़ा। रूचिता कुमारी ने कहा कि एंबुलेंस का फंसना प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है। 

नंदिनी कुमारी ने त्योहारों से पहले ठोस व्यवस्था की मांग की। अभिभावक मनोज खत्री ने बताया कि जाम से बच्चों की पढ़ाई और होमवर्क बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। 

वहीं आलोक चौधरी ने कहा कि भारी वाहनों के बीच बच्चों को पैदल ले जाना जोखिम भरा है और वैकल्पिक साधनों से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

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