बिना डॉक्टर के पर्चे बिकने वाली दवाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ड्रग्स नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही

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अब हर मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर सख्त निगरानी रखना अनिवार्य होगा. बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाएं बेचने वाले मेडिकल स्टोर्स पर अब सरकार की नजर सख्त होने जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करते हुए ड्रग्स रूल्स 1945 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत मेडिकल स्टोर पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे. दिलचस्प बात यह है कि सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब लोकल सर्कल्स के एक बड़े सर्वे में यह सामने आया है कि देश के 64 प्रतिशत उपभोक्ताओं को उनका मेडिकल स्टोर कभी या बहुत कम ही डॉक्टर का पर्चा मांगता है. इस सर्वे में देशभर के 327 जिलों से 1 लाख 6 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. 

क्या सरकार का नया प्रस्ताव?

नए ड्राफ्ट के तहत ड्रग्स रूल 65(2) के बाद एक नया सब रूल 2A जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके मुताबिक डॉक्टर की पर्ची पर बिकने वाली किसी भी दवाई की सप्लाई सीसीटिवी निगरानी में ही होनी चाहिए. इसका मुख्य मकसद शेड्यूल H, H1 और X दवाओं की बिक्री पर नजर रखना और बिना वैध पर्ची के इनकी बिक्री रोकना है. इस प्रस्ताव को ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी में चर्चा के बाद ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है, और अब मंत्रालय ने आम लोगों से इस पर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. 

शेड्यूल H में शामिल हैं कई गंभीर बीमारियों की दवाएं

शेड्यूल H में वह दवाएं आती हैं, जो डॉक्टर की सलाह और पर्ची के बिना नहीं दी जा सकतीं. इसमें कैंसर, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, एलर्जी और अन्य कई गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं. यह सिर्फ किसी एक बीमारी की दवाओं की सूची नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग तरह की कई अहम दवाएं आती हैं, जिनका गलत इस्तेमाल सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

क्यों जरूरी समझी गई है सीसीटीवी की व्यवस्था?

स्वास्थ्य मंत्रालय चाहता है कि दवाओं की बिक्री तय नियमों के मुताबिक ही हो. इसीलिए मेडिकल स्टोर्स पर सीसीटीवी लगाने का प्रस्ताव लाया गया है. इससे यह ट्रैक करना आसान हो जाएगा कि दुकानदार किन दवाओं को किन ग्राहकों को बिना पर्ची के बेच रहे हैं. इसके अलावा कुछ दवाएं ऐसी भी हैं, जिनके गलत इस्तेमाल या नशे के लिए दुरुपयोग होने का खतरा बना रहता है, ऐसी दवाओं की बिक्री और रिकॉर्ड रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

सर्वे में क्या निकलकर आया?

लोकल सर्कल्स के सर्वे का सबसे चौंकाने वाला नतीजा यही रहा कि 64 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि उनके स्थानीय केमिस्ट ने कभी या बहुत कम ही डॉक्टर की पर्ची मांगी, जबकि सिर्फ 15 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनका केमिस्ट ज्यादातर या हमेशा पर्ची पर ही दवा देता है. इसी तरह सिर्फ 31 प्रतिशत लोगों को ही ज्यादातर बार किसी क्वालिफाइड फार्मासिस्ट से मदद मिल पाई, जबकि 13 प्रतिशत लोगों को दुकान पर मौजूद जिस व्यक्ति ने मदद की, वह क्वालिफाइड फार्मासिस्ट था ही नहीं. 

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