जैविक खेती को बढ़ावा देकर महिलाओं की आजीविका संवर्धन की दिशा में रायबरेली ने बढ़ाया कदम

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डीएम सरनीत कौर ब्रोका की पहल से महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया अवसर, गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर


रायबरेली : जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका के निर्देशन एवं मुख्य विकास अधिकारी अंजुलता के मार्गदर्शन में जनपद रायबरेली में “जैविक खेती अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं एवं विषमुक्त खेती, कर्ज मुक्त किसान” की थीम के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आजीविका को सशक्त एवं स्थायी बनाने की दिशा में अभिनव पहल की जा रही है।
उपायुक्त श्रम रोजगार प्रमोद सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विकासखंड अमावां, बछरावां, सलोन, डलमऊ, महराजगंज एवं डीह में संचालित गौशालाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए 15 स्वयं सहायता समूहों की 180 महिलाओं को बायो कम्पोस्ट खाद के उत्पादन से जोड़ा गया है। महिलाओं द्वारा गौशालाओं से प्राप्त गोबर का वैज्ञानिक एवं उपयोगी तरीके से प्रसंस्करण करते हुए जून 2026 से बायो कम्पोस्ट खाद का उत्पादन किया जा रहा है।
बायो कम्पोस्ट के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी एवं विपणन संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए एवरग्रीन ऑर्गेनिक कम्पनी, रायबरेली के साथ समूहों का अनुबंध कराया गया है। इसके माध्यम से महिलाओं को बायो कम्पोस्ट के उत्पादन, गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं बाजार उपलब्धता से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा अब तक लगभग 250 से 300 टन बायो कम्पोस्ट खाद का उत्पादन किया जा चुका है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय का नया स्रोत प्राप्त होने के साथ-साथ जैविक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि को भी बढ़ावा मिल रहा है।
बायो कम्पोस्ट की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता विभाग एवं कृषि विभाग द्वारा संचालित उर्वरक बिक्री केन्द्रों के साथ स्वयं सहायता समूहों का समन्वय एवं अनुबंध कराया गया है। इन बिक्री केन्द्रों के माध्यम से समूहों द्वारा उत्पादित बायो कम्पोस्ट को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
इसी क्रम में 30 जुलाई 2026 को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बी-पैक्स उतरपारा, विकास खण्ड राही में बायो कम्पोस्ट बिक्री कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया।
कार्यशाला में किसानों द्वारा 50 बोरी बायो कम्पोस्ट का क्रय किया गया। किसानों द्वारा बायो कम्पोस्ट की लगातार की जा रही मांग से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा उत्पादित जैविक खाद की उपयोगिता एवं स्वीकार्यता को बल मिला है।
बायो कम्पोस्ट की किसानों द्वारा निरंतर की जा रही मांग को देखते हुए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से इसके उत्पादन में वृद्धि के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उद्देश्य है कि अधिक से अधिक महिलाओं को इस गतिविधि से जोड़कर उनकी आजीविका में वृद्धि, नियमित आय एवं स्थायी स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार बायो कम्पोस्ट के उत्पादन एवं बिक्री की गतिविधियों को और व्यापक रूप देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की जा सके।
बायो कम्पोस्ट के उत्पादन से जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आजीविका का नया साधन उपलब्ध हो रहा है, वहीं गौशालाओं में उत्पन्न होने वाले गोबर का उपयोगी एवं वैज्ञानिक प्रबंधन भी सुनिश्चित हो रहा है। इससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।
जनपद में संचालित अन्य गौशालाओं में भी बायो कम्पोस्ट खाद के उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाने तथा अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इस कार्य में नियोजित करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल महिला सशक्तिकरण, जैविक खेती को बढ़ावा देने, गौशालाओं के बेहतर प्रबंधन, अपशिष्ट के सदुपयोग तथा ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं अनुकरणीय प्रयास है।

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