झारखंड: कोयला खदानों से रुक नहीं रही कोयले की चोरी, छोटे वाहनों से बड़े पैमाने पर अवैध ढुलाई जारी

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झारखंड: कोयला खदानों से रुक नहीं रही कोयले की चोरी, छोटे वाहनों से बड़े पैमाने पर अवैध ढुलाई जारी

रायबरेली : राज्य के विभिन्न कोयला खदान क्षेत्रों में अवैध कोयला खनन और तस्करी पर लगाम लगाने के प्रशासनिक दावों की हवा निकलती दिख रही है। विभिन्न खदान क्षेत्रों से लगातार बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी और उसका अवैध परिवहन जारी है। हैरान करने वाली बात यह है कि अब तस्करों ने कार्रवाई से बचने और पुलिस की नजरों से छुपने के लिए छोटे वाहन मोटरसाइकिल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
​दिन-रात चल रहा है अवैध कारोबार
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोयला खदानों और डंपिंग यार्डों से रोजाना सैकड़ों टन कोयला अवैध रूप से निकाला जा रहा है। छोटे वाहनों के जरिए इस कोयले को गुप्त ठिकानों, अवैध डिपो और आसपास के ईंट-भट्ठों तक पहुंचाया जाता है। छोटी गाड़ियों से बार-बार ढुलाई करने से यह काम सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की नजरों में आसानी से नहीं आता।
​सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस तंत्र पर उठे सवाल
खनन क्षेत्रों में सीआईएसएफ (CISF), स्थानीय पुलिस और खनन विभाग की मौजूदगी के बावजूद इस स्तर पर कोयले की चोरी होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी केवल दिखावे के लिए इक्का-दुक्का गाड़ियों को जब्त कर
खानापूर्ति कर दी जाती है, जबकि मुख्य सरगना और सिंडिकेट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
​राजस्व को भारी नुकसान, पर्यावरण पर खतरा
अवैध कोयला खनन और परिवहन के इस पूरे खेल से जहां राज्य सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं असुरक्षित तरीकों से की जा रही खुदाई के कारण कई क्षेत्रों में भू-धंसान और दुर्घटनाओं का खतरा मंडरा रहा है।
​अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और खनन विभाग इस अवैध सिंडिकेट के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाता है या अवैध ढुलाई का यह खेल यूं ही निर्बाध रूप से चलता रहेगा।

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