रायबरेली : जनपद रायबरेली में धान खरीफ मौसम की प्रमुख फसल है तथा सर्वाधिक क्षेत्रफल में धान की खेती की जाती है। वर्तमान समय में जनपद के कुछ क्षेत्रों में धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट एवं तना छेदक कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इन कीटों के समय से नियंत्रण न किए जाने पर फसल की पत्तियों एवं तनों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ उत्पादन में कमी हो सकती है।
पत्ती लपेटक कीट के लक्षण
पत्ती लपेटक कीट की छोटी सुंडी धान की पत्ती को किनारे से मोड़कर/लपेटकर उसके अंदर रहकर पत्ती की हरी सतह को खुरचकर खाती है। प्रभावित पत्तियों पर सफेद अथवा पारदर्शी धारियां दिखाई देती हैं तथा कई पत्तियां लंबाई में मुड़ी हुई या नलीनुमा दिखाई देती हैं। अधिक प्रकोप होने पर पौधे की हरी पत्तियों का क्षेत्रफल कम होने से प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है।
तना छेदक कीट के लक्षण
तना छेदक कीट की सुंडी पौधे के तने में प्रवेश कर अंदरूनी भाग को खाती है। प्रारम्भिक अवस्था में पौधे की बीच की पत्ती सूखकर पीली पड़ जाती है, जिसे ‘डेड हार्ट’ (मृत गोभ) कहा जाता है। फसल में बालियां निकलने के समय प्रकोप होने पर बालियां सूखकर सफेद दिखाई देती हैं और उनमें दाने नहीं बनते। इस अवस्था को ‘व्हाइट ईयर’ (सफेद बाली) कहा जाता है।
किसानों के लिए समेकित नियंत्रण उपाय
- खेत का नियमित निरीक्षण करें तथा प्रभावित पत्तियों एवं पौधों को पहचानकर यथासंभव नष्ट करें।
- तना छेदक की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग किया जा सकता है। खेत में कीट की स्थिति के अनुसार निगरानी करते हुए समय से नियंत्रण उपाय अपनाएं।
- अत्यधिक नत्रजन/यूरिया के असंतुलित प्रयोग से बचें। संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से कीटों के अनुकूल अत्यधिक कोमल फसल वृद्धि को कम किया जा सकता है।
रासायनिक नियंत्रण
यदि पत्ती लपेटक अथवा तना छेदक का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर तक पहुंच रहा हो, तो निम्न में से किसी एक कीटनाशी का लेबल/अनुमोदित उपयोग के अनुसार छिड़काव करें— - कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50% SP
धान में तना छेदक (Stem Borer), पत्ती लपेटक (Leaf Folder) तथा व्हर्ल मैगॉट (Whorl Maggot) के नियंत्रण के लिए इसका व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।
मात्रा: 400 ग्राम प्रति एकड़।
प्रयोग विधि: पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। छिड़काव का घोल पौधों के निचले भाग तथा पत्तियों की भंवरी/गुच्छे (Whorl) में अच्छी तरह पहुँचे, जहाँ कीट अधिक पाए जाते हैं।
छिड़काव का उपयुक्त समय: तापमान कम होने पर सुबह जल्दी या शाम को छिड़काव करना बेहतर रहता है।
अथवा - लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 5% EC
धान में कीट नियंत्रण के लिए प्रयुक्त कीटनाशी है।
मात्रा: सामान्यतः लगभग 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी अथवा लगभग 400 मिलीलीटर प्रति एकड़।
उपरोक्त के अतिरिक्त निम्न रसायनों में से कोई एक का भी प्रयोग किया जाता है
कीटनाशी| मात्रा प्रति हेक्टेयर| उपयोग
Chlorantraniliprole 18.5 SC (क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी)| 150 मिली/हेक्टेयर| पत्ती लपेटक एवं तना छेदक
Flubendiamide 480 SC (फ्लूबेन्डियामाइड 480 एस सी)| 50 मिली/हेक्टेयर| पत्ती लपेटक एवं तना छेदक
कीटनाशी की वास्तविक मात्रा फसल, कीट की स्थिति और अनुशंसित लेबल मात्रा के अनुसार रखी जानी चाहिए।
प्रयोग विधि:कीटनाशी का छिड़काव करते समय साफ पानी की अनुशंसित मात्रा में दवा को अच्छी तरह मिलाकर पत्तियों एवं पौधों के प्रभावित भागों पर समान रूप से छिड़काव करें। दवा की मात्रा निर्धारित मात्रा से अधिक न करें तथा एक साथ कई कीटनाशियों को बिना तकनीकी सलाह के मिलाकर प्रयोग न करें।
किसान भाई किसी कीट की पहचान अथवा कीटनाशी के चयन में भ्रम होने पर अपने निकटतम राजकीय कृषि रक्षा इकाई/कृषि विभाग के कर्मचारी से सलाह प्राप्त करें।
































































