रायबरेली: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय शेष है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में 2029 के लोकसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है। रायबरेली सदर सीट से भाजपा विधायक और पूर्व विधायक स्वर्गीय अखिलेश सिंह की पुत्री अदिति सिंह को लेकर इन दिनों कयासों का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीति में उनकी कांग्रेस में ‘घर वापसी’ की चर्चाएं तेजी से जोर पकड़ रही हैं।
सरकारी व राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी ने बढ़ाई हलचल
इन कयासों को बल हाल की दो बड़ी घटनाओं से मिला है:
दिशा समिति की बैठक: रायबरेली के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अध्यक्षता में आयोजित ‘दिशा’ (DISHA) समिति की बैठक में अदिति सिंह की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।
सीएम योगी के कार्यक्रम से दूरी: ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वागत कार्यक्रम में भी सदर विधायक अदिति सिंह नजर नहीं आईं।
इन दोनों प्रमुख आयोजनों से दूरी बनाए जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने हिसाब से सियासी मायने निकाल रहे हैं। हालांकि, अदिति सिंह या उनकी टीम की ओर से कांग्रेस में वापसी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
2029 के सियासी समीकरण और रायबरेली
रायबरेली से राहुल गांधी के सांसद बनने और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के बढ़ते प्रभाव के चलते स्थानीय समीकरणों में बदलाव की सुगबुगाहट देखी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भविष्य में रायबरेली सदर सीट कांग्रेस के पाले में मजबूत स्थिति बनाती है, तो अदिति सिंह जैसी पकड़ रखने वाली स्थानीय नेता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
दूसरी ओर, प्रदेश में चंद्रशेखर आजाद और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं के जरिए तीसरे मोर्चे की किसी भी संभावित गोलबंदी का असर भाजपा और सपा दोनों के परंपरागत वोट बैंक पर पड़ सकता है।
फिलहाल 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए रायबरेली की राजनीति में यह कयासबाजी नया मोड़ ले रही है। अदिति सिंह का अगला सियासी कदम ही इन तमाम अटकलों पर विराम लगाएगा।





























































