भाग्य रेखा हथेली के मणिबंध के ऊपर से निकल कर अन्य रेखाओं का सहारा लेते हुए

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भाग्य रेखा को शनि रेखा भी कहते हैं क्योंकि यह रेखा शनि पर्वत पर जाकर समाप्त होती है। शनि पर्वत मध्यमा उंगली के ठीक नीचे वाला स्थान होता है। शनि पर्वत ये बताता है कि आपको भाग्य का साथ मिलेगा या नहीं? हथेली के किसी भी स्थान से शुरू होकर अगर कोई रेखा सीधे शनि पर्वत पर पहुंचती है तो वही भाग्य रेखा कहलाती है। कहते हैं यदि यह रेखा बिना कटे और बिना किसी अन्य रेखा का सहारा लिए सीधे शनि पर पहुंच जाती है, तो ऐसे लोगों का भाग्य काफी मजबूत रहता है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि अगर किसी के हाथ में भाग्य रेखा है ही नहीं तो उसका भाग्य कैसा होगा?

हाथ में भाग्य रेखा के न होने का मतलब?

  • जिन हाथों में भाग्य रेखा नहीं होती, इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें जीवन में कभी सफलता नहीं मिलेगी। बल्कि इससे ये पता चलता है कि ऐसे लोगों को जो कुछ भी जीवन में मिलेगा वो उनके कर्मों और कड़ी मेहनत के अनुसार ही मिलेगा।
  • जिन लोगों के हाथ में भाग्य रेखा नहीं होती, ऐसे लोगों को जीवन में सबकुछ खुद से ही करना होता है। इनकी उन्नति में भाइयों, सम्बन्धियों या रिश्तेदारों किसी का कोई सहयोग नहीं होता।
  • ऐसे लोगों को न तो समाज से किसी प्रकार का कोई सहयोग मिलता है और न परिवार से। ये जो कुछ भी करते हैं अपने दम पर ही करते हैं।
  • ऐसे लोगों के जीवन में उतार-चढ़ाव अधिक होते हैं क्योंकि इन्हें भाग्य का सहारा कम ही प्राप्त होता है।
  • लेकिन इन लोगों के लिए शिक्षा, कौशल और कर्म ही सबसे बड़ा सहारा होता है।
  • जिनके हाथ में भाग्य रेखा नहीं होती, ऐसे लोग मेहनती, व्यावहारिक और कर्मशील होते हैं।
  • ऐसे लोग अपने जीवन को स्वयं दिशा देते हैं और कर्मयोगी बनते हैं।
  • सरल शब्दों में समझें तो भाग्य रेखा का हाथ में ना होना नकारात्मक नहीं है, बल्कि कर्मयोगी बनने का संकेत है। 
  • ऐसे लोग कड़ी मेहनत के बल पर जीवन में अपार सफलता प्राप्त करते हैं।
  • ऐसे लोग जो ठान लेते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। अगर यह लोग अपने कर्म करने से पीछे नहीं हटें तो अपनी तकदीर बदल सकते हैं।

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