बढ़ते ऑपरेटिंग कॉस्ट के बीच गैस वितरकों को बड़ी राहत मिली

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आखिरकार तेल कंपनियों ने डीलरशिप कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. यह फैसला उनकी शिकायतों के बाद उठाया गया है.

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त रूप से सिफारिश करने पर सहमति जताई है. ऑल इंडिया एचपी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (AIHPGDA) ने इसकी जानकारी दी है. हालांकि, कमीशन में संशोधन का यह प्रस्ताव अभी भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) की मंजूरी के अधीन है.

बीते 21 अक्टूबर को मुंबई में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के हेड ऑफिस में सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) और ऑल इंडिया हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (AIHPGDA) के बीच एक बैठक हुई, जिसके बाद 22 अक्टूबर को AIHPGDA के चेयरमैन राजेंद्र बी ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि तेल कंपनियां एलपीजी वितरकों के कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी (Interim Hike) करने पर सहमत हो गई हैं. 

एसोसिएशन ने कहा, “मैनेजमेंट ने हमें बताया कि संशोधन के प्रस्ताव पहले ही MoPNG को सौंपे जा चुके हैं. डायरेक्टरों ने एक निश्चित समय-सीमा के भीतर कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त रूप से सिफारिश करने पर भी सहमति जताई है। अब मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है.”

डीलरशिप कमीशन क्या होता है?

डीलरशिप कमीशन उस अमाउंट को कहते हैं, जिसका भुगतान तेल मार्केटिंग कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) अपने गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स या एजेंसियों को सिलेंडर बेचने और उनकी सुरक्षित डिलीवरी कराने के बदले करती हैं. इसमें गोदाम से लेकर सिलेंडर की डिलीवरी कराने तक के सारे खर्च शामिल होते हैं. 

अभी कितना मिलता है कमीशन?

वर्तमान नियमों के अनुसार, भारत में 14.2 किलोग्राम वाले एक घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर वितरकों को लगभग  73 रुपये का कमीशन मिलता है. इसमें से करीब 30 से 35 रुपये केवल डिलीवरी चार्जेस के तौर पर निर्धारित होते हैं. गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स इसे बढ़ाने की काफी लंबे समय से मांग कर रहे थे.

चेयरमैन राजेंद्र बी के अनुसार, पिछले कुछ सालों में डिलीवरी बॉय की सैलरी से लेकर पेट्रोल-डीजल का कॉस्ट बढ़ा है. गोदाम के किराए में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में अभी जितना कमीशन मिल रहा है, उसमें काम करना वितरकों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था.

मुंबई बैठक में बनी इस सहमति के बाद अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही नया बढ़ा हुआ कमीशन लागू कर दिया जाएगा.

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