मूर्तिकार ने कहा, ‘हम तेलंगाना की विकास की सोच और मुख्यमंत्री के विज़न को अपना रहे

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हम यह दिखाना चाहते थे कि तेलंगाना तरक्की कर रहा है. फिल्म से प्रेरित होकर हमने यह मूर्ति बनवाई है. हैदराबाद के गोशामहल में गणेश पंडाल ने इस त्योहार के मौसम में काफी ध्यान खींचा है, क्योंकि यहां भगवान गणेश की मूर्ति की तुलना ‘बाहुबली’ फिल्म से की जा रही है. कांग्रेस नेता और तेलंगाना फिशरमेन कोऑपरेटिव सोसाइटीज फेडरेशन के चेयरमैन मेट्टू साई कुमार द्वारा लगाई गई. 

यह गणेश मूर्ति सरकार के कार्यकाल के 1,000 दिन पूरे होने के जश्न का हिस्सा थी. इसका मकसद मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को भगवान गणेश को अपने कंधे पर उठाए हुए दिखाना था, ठीक वैसे ही जैसे ‘बाहुबली’ फिल्म में हीरो शिव लिंग को अपने सिर पर उठाता है.

इस अनोखे आइडिया के बारे में बात करते हुए साईं कुमार ने कहा कि इसका मकसद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के विकास को दिखाना था. उन्होंने कहा कि वे पंडाल में लगी झांकियों के जरिए सरकार की अलग-अलग योजनाओं को दिखाना चाहते थे. उन्होंने कहा, ‘हम तेलंगाना की विकास की सोच और मुख्यमंत्री के विज़न को अपना रहे हैं. हम यह दिखाना चाहते थे कि तेलंगाना तरक्की कर रहा है. फिल्म से प्रेरित होकर हमने यह मूर्ति बनवाई है. हम चाहते हैं कि लोग विकास की भावना को अपनाएं और भगवान गणेश के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री लोगों की सेवा करते रहें.’

झांकी पर हो रही आलोचना

इस अनोखी झांकी की आलोचना भी हुई. बीजेपी विधायक टी. राजा सिंह ने हैदराबाद पुलिस कमिश्नर सी.वी. आनंद से मांग की है कि वे त्योहार और हिंदुओं का अपमान करने के लिए मेट्टू साई कुमार के खिलाफ कार्रवाई करें. 

उन्होंने कहा, ‘हालांकि मुख्यमंत्री का पद एक संवैधानिक पद है, लेकिन उन्हें (रेवंत रेड्डी) भगवान के रूप में नहीं दिखाया जा सकता. इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं. भले ही उन्हें अपनी तस्वीर लगाने का अधिकार है, लेकिन उन्हें हिंदुओं की भावनाओं को समझना चाहिए.’ 

पुलिस ने पहले भी मुख्यमंत्री के रूप-रंग वाली गणेश मूर्ति को हटाकर उसकी जगह सामान्य गणेश मूर्ति लगवाई थी. यह पहली बार नहीं है जब मेट्टू साई कुमार ने ऐसी गणेश मूर्ति लगाई है जो चर्चा का विषय बनी हो. पिछले साल, जब पूरे राज्य में फ़िल्मी सितारों या फिल्मों की थीम पर आधारित गणेश जी की मूर्तियाँ बनाई जा रही थीं, तब मेट्टू ने कुछ अलग करने का फैसला किया और मुख्यमंत्री की हालिया पदयात्रा की एक तस्वीर पर आधारित गणेश जी की मूर्ति का अनावरण किया. 

सफेद शर्ट, काली धोती और हरे मफ़लर में सजी यह मूर्ति बिल्कुल मुख्यमंत्री जैसी दिख रही थी. पिछले साल भी ऐसी ही शिकायत हुई थी और पुलिस ने मूर्ति को हटा दिया था. गोशामहल के गणेश पंडाल में जहां उत्सुक और श्रद्धालु लोगों की भीड़ उमड़ती है, वहीं इस तरह की झांकी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ भी देखने को मिली हैं. कुछ लोगों को यह राज्य में हो रहे विकास को दिखाने का एक नया और अनोखा तरीका लगा. वहीं, दूसरों का कहना था कि यह हिंदू भावनाओं का अपमान है.

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