ऊंचाहार में किसानों हेतु विभिन्न फसलों के निःशुल्क बीज मिनीकिट उपलब्ध, बुकिंग प्रक्रिया प्रारंभ

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ऊंचाहार : कृषि विभाग, ऊॅंचाहार द्वारा किसानों की आय वृद्धि, फसल विविधीकरण, पोषण सुरक्षा तथा श्री अन्न (मोटे अनाज) के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न फसलों के निःशुल्क बीज मिनीकिट उपलब्ध कराए गए हैं। इन मिनीकिटों के वितरण हेतु वर्तमान में किसानों की बुकिंग की प्रक्रिया संचालित है।

इच्छुक किसान राजकीय कृषि बीज भण्डार, ऊॅंचाहार प्रभारी एवं कृषि विभाग के कार्मिकों से संपर्क कर अथवा जनसुविधा केंद्रों से बुकिंग करा सकते हैं तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निःशुल्क मिनीकिट प्राप्त कर सकते हैं।

वर्तमान में ऊॅंचाहार ब्लाक के राजकीय कृषि बीज भण्डार पर निम्नलिखित बीज मिनीकिट उपलब्ध हैं—

उरद – 85 पैकेट (प्रति पैकेट 4 किलोग्राम)

मूंग – 13 पैकेट (प्रति पैकेट 4 किलोग्राम)

अरहर – 30 पैकेट (प्रति पैकेट 4 किलोग्राम)

तिल – 80 पैकेट (प्रति पैकेट 2 किलोग्राम)

कोदो – 15पैकेट (प्रति पैकेट 3 किलोग्राम)

रागी (मंडुआ) – 85 पैकेट (प्रति पैकेट 3 किलोग्राम)

बाजरा – 197 पैकेट (प्रति पैकेट 1 किलोग्राम)

कृषि विभाग द्वारा किसानों को दलहनी, तिलहनी एवं श्री अन्न फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मूंग, उरद एवं अरहर जैसी दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में सहायक होती हैं तथा किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करती हैं। तिल एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।

इसी प्रकार बाजरा, रागी (मंडुआ) एवं कोदो जैसे श्री अन्न पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ कम पानी एवं प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक उत्पादन देने वाली फसलें हैं। इन फसलों का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है तथा इनके उत्पादन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

अतः किसानों से अपील की जाती है कि वे अधिक से अधिक संख्या में निःशुल्क बीज मिनीकिट हेतु बुकिंग कराएं तथा ई लाटरी से चयन होने पर बायोमैट्रिक से मिनीकिट प्राप्त कर इन फसलों की खेती अपनाएं। साथ ही अन्य किसानों को भी श्री अन्न, दलहनी एवं तिलहनी फसलों के महत्व के प्रति जागरूक करें।

किसानों से अनुरोध है कि सीमित संख्या में उपलब्ध मिनीकिटों का लाभ प्राप्त करने हेतु शीघ्र बुकिंग कराएं तथा कृषि विभाग की इस महत्वपूर्ण योजना का अधिकतम लाभ उठाएं।

“श्री अन्न अपनाएं – पोषण बढ़ाएं, आय बढ़ाएं और खेती को अधिक टिकाऊ बनाएं।”

सहायक विकास अधिकारी कृषि, शिव प्रसाद चौरसिया

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