सीआईएसएफ ने लगातार 12वीं बार जीती एनएचआरसी वाद-विवाद प्रतियोगिता, केंद्रीय सुरक्षा बलों में फिर दिखाई बादशाहत

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रायबरेली : देश के प्रमुख रणनीतिक संसाधनों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए जानी जाने वाली केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने एक बार फिर अपनी पेशेवर उत्कृष्टता का दम दिखाया है। वर्ष 2025 की तीसरी CRPFS–NHRC वाद-विवाद प्रतियोगिता में टॉप पोज़िशन हासिल करते हुए CISF ने न सिर्फ बाज़ी मारी, बल्कि लगातार 12वीं बार यह प्रतिष्ठित रोलिंग ट्रॉफी अपने नाम करके इतिहास भी रच दिया।

प्रतियोगिता में CRPFS के 6 बलों के कुल 24 प्रतिभागियों ने विभिन्न चरणों में अपने तर्क, वक्तृत्व और विश्लेषणात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबला आज अटल ऊर्जा भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तथा विभिन्न सरकारी संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर माननीय एचआरसी न्यायमूर्ति श्री राम सुब्रमण्यम मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने CISF टीम को विजेता ट्रॉफी प्रदान की और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया।


किसने क्या जीता — CISF का दबदबा बरकरार

हिंदी श्रेणी (विपक्ष)

असिस्टेंट कमांडेंट मयंक वर्मा, CISF — प्रथम स्थान

असम राइफल्स — द्वितीय स्थान

सीमा सुरक्षा बल (BSF) — तृतीय स्थान

अंग्रेजी श्रेणी (विपक्ष)

असिस्टेंट कमांडेंट अरुंधति सी, CISF — प्रथम स्थान

असम राइफल्स — द्वितीय स्थान

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) — तृतीय स्थान


NISA हैदराबाद की ट्रेनिंग ने दिखाई चमक

प्रतियोगिता में CISF की लगातार सफलता का श्रेय कई विशेषज्ञ मानकों को दिया गया, जिनमें नेशनल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एकेडमी (NISA), हैदराबाद की उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था प्रमुख है। NISA के प्रशिक्षकों द्वारा दी गई वक्तृत्व कला, तार्किक अभिव्यक्ति और व्यक्तित्व निखारने की विशेष ट्रेनिंग ने प्रतिभागियों को मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रखने में बड़ी भूमिका निभाई।


12 वर्षों की अटूट जीत — समर्पण, अनुशासन और क्षमता का प्रमाण

लगातार 12 वर्षों तक यह ट्रॉफी जीतना CISF के अधिकारियों की

कठोर मेहनत

कमिटमेंट

और तर्क प्रस्तुत करने की अद्भुत कला
का प्रमाण है।

प्रतियोगिता के आयोजक बल सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। NHRC अधिकारियों ने इस मौके पर कहा कि CISF की यह उपलब्धि न सिर्फ बल की श्रेष्ठता को दर्शाती है, बल्कि सुरक्षा बलों में पेशेवर अभिव्यक्ति और जागरूकता की संस्कृति को भी मजबूत करती है।

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