पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की छठीं पुण्यतिथि पर पूनम सिंह ने दी श्रद्धांजलि, गरीबों को कराया भोजन

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रायबरेली : उत्तर प्रदेश की राजनीति में रायबरेली को नई पहचान दिलाने वाले लोकप्रिय नेता अखिलेश भैय्या की पुण्यतिथि पर आज जिलेभर में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन हुआ। जनमानस का कहना है कि भैय्या का पूरा जीवन गरीबों, किसानों और असहायों की सेवा में बीता और यही उन्हें “जननायक” बनाता है।

साधारण परिवार से जननायक तक

15 सितंबर 1959 को रायबरेली के गाँव लालूपुर में जन्मे अखिलेश भैय्या ने शिक्षा पूरी करने के बाद राजनीति की ओर रुख किया। वर्ष 1993 में उन्होंने रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। जनता ने उन पर विश्वास जताते हुए भारी मतों से विजय दिलाई और पहली बार विधानसभा भेजा।

तीन दशक तक जनता की निस्वार्थ सेवा

पहली जीत के बाद ही भैय्या ने खुद को जनता का सेवक माना। गरीब कन्याओं की शादियों से लेकर अग्निपीड़ित परिवारों की मदद और किसानों की समस्याओं को सुलझाने तक—उनका हर कदम समाज की भलाई के लिए था। यही कारण रहा कि लगभग तीन दशकों तक वे रायबरेली की आवाज बनकर विधानसभा पहुँचते रहे।

जनता के बीच रही गहरी पकड़

भैय्या की छवि एक निर्भीक, ईमानदार और संवेदनशील जनप्रतिनिधि की रही। क्षेत्र में किसी भी दुख-दर्द या विपत्ति की घड़ी में वे सबसे पहले मौजूद होते थे। यही वजह है कि आज रायबरेली की जनता उन्हें अपना संरक्षक मानकर याद करती है।

पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में वक्ताओं ने कहा कि “अखिलेश भैय्या ने हमें जो राह दिखाई है, उस पर चलना ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। गरीबों और असहायों की सेवा करना उनकी सबसे बड़ी सीख है।”

निष्कर्ष

आज रायबरेली के लोग न सिर्फ एक जनप्रतिनिधि को याद कर रहे हैं, बल्कि उस सेवाभाव को भी जीवित कर रहे हैं जिसने उन्हें “भैय्या” से “जननायक” बना दिया।

विशेष रिपोर्ट : विजय कुमार शुक्ला

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