प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलंबन प्रशिक्षण: तीसरे दिन विषय वस्तु विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
रायबरेली : कृषि क्षेत्र में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलंबन प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक विषयों पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने युवाओं को आधुनिक कृषि, पशुपालन, मृदा परीक्षण और सरकारी योजनाओं से जोड़कर कृषि व्यवसाय में सफल होने के गुर सिखाए।
आधुनिक कृषि और सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के पहले सत्र में विषय वस्तु विशेषज्ञ अजेंद्र सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कृषि क्षेत्र की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
क्रॉप सिस्टम (फसल प्रणाली): फसल चक्र अपनाकर उत्पादन बढ़ाने की तकनीक।
मृदा परीक्षण (Soil Testing): मिट्टी की सेहत जांचने और आवश्यकतानुसार उर्वरकों के सही इस्तेमाल का तरीका।
पशुपालन व एकीकृत कृषि: कृषि के साथ-साथ पशुपालन को अपनाकर अतिरिक्त आय सृजित करना
कृषि योजनाएं: केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी।
मनमोहक कविता से भरा युवाओं में उत्साह
सत्र के अंत में अजेंद्र सिंह ने अपनी एक मनमोहक कविता के माध्यम से संपूर्ण कृषि चक्र और इसकी महत्ता को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में पिरोकर प्रस्तुत किया। उनकी इस प्रेरणादायक कविता ने प्रशिक्षण में आए युवाओं में नया जोश भर दिया और उन्हें कृषि उद्यमिता की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया।
लाइसेंस प्रक्रिया व पंजिकाओं (रजिस्टर) के रख-रखाव पर चर्चा
दिन के दूसरे सत्र में अपर जिला कृषि रक्षा अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों को तकनीकी एवं कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को बताया कि:
कृषि व्यवसाय/दुकान शुरू करने के लिए लाइसेंस कैसे बनवाएं और उसकी प्रक्रिया क्या है।
व्यावसायिक पारदर्शिता और सरकारी मानकों को पूरा करने के लिए रजिस्टर और स्टॉक का रखरखाव (Record Keeping) कैसे सही तरीके से किया जाए।
निष्कर्ष: प्रशिक्षण का यह तीसरा दिन युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रहा। विशेषज्ञों के इस मार्गदर्शन से कृषि क्षेत्र में नए व्यवसायों को स्थापित करने में युवाओं को सीधी मदद करेगी































































