रायबरेली : अपनी कलम की जादूगरी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले और संगीत जगत को 300 से अधिक एलबम देने वाले सुप्रसिद्ध गीतकार परम हंस मौर्य इन दिनों अपने नए सुपरहिट गाने ‘नमकीन जवानी रे’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं। KNS LIVE के लिए वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार शुक्ला ने उनसे उनकी इस लंबी और प्रेरणादायक साहित्यिक यात्रा पर विशेष बातचीत की।
मंदिरों के भजनों से शुरू हुआ सफर
बातचीत के दौरान परम हंस मौर्य ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उनकी लेखनी की शुरुआत रायबरेली के स्थानीय मंदिरों में गाए जाने वाले भक्ति गीतों से हुई थी। उन्होंने साझा किया कि कैसे एक छोटे से कस्बे से निकलकर उन्होंने भोजपुरी और हिंदी संगीत उद्योग में अपनी पहचान बनाई। आज 300 एलबम का आंकड़ा पार करने के बाद भी वे खुद को एक जिज्ञासु छात्र मानते हैं और निरंतर सीखने की ललक ही उनकी सफलता का मूल मंत्र है।
‘नमकीन जवानी रे’ की धूम
शिल्पी राज की आवाज में सजे गाने ‘नमकीन जवानी रे’ की अपार सफलता पर चर्चा करते हुए मौर्य ने कहा कि इस गीत की सरलता और सोशल मीडिया पर इसकी पहुंच ने इसे हर वर्ग की पसंद बना दिया है। उन्होंने बताया कि एक गीतकार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि तब होती है जब उसके शब्द आम जनमानस की जुबान पर चढ़ जाएं।
सामाजिक सरोकार और रचनात्मक दर्शन
सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देना भी मौर्य की लेखनी का उद्देश्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी रचनाएं समाज से प्रेरित होती हैं। वे चाहते हैं कि उनके गीतों के माध्यम से युवाओं को प्रेरणा मिले और समाज में सकारात्मक बदलाव आए।
अब फिल्मों और वेब सीरीज में आजमाएंगे किस्मत
भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि वे अब केवल संगीत तक ही सीमित नहीं रहना चाहते। आने वाले समय में दर्शकों को उनके लिखे कई नए हिंदी गाने, शॉर्ट फिल्में और वेब सीरीज देखने को मिलेंगी। वे रचनात्मकता के नए आयामों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भावुक कर देने वाली काव्यात्मक विदाई
साक्षात्कार के अंत में परम हंस मौर्य ने अपनी गहरी संवेदनाओं को एक शानदार ‘मुक्तक’ के माध्यम से व्यक्त किया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने न केवल उनकी लेखन की गहराई को दर्शाया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि एक सच्चा कलाकार अपने शब्दों से किसी भी कहानी को जीवंत कर सकता है।






























































