उसने जम्मू की TADA/POTA कोर्ट में हलफनामा (affidavit) दाखिल किया है, जहां उसके खिलाफ हत्या के मामले की सुनवाई चल रही है। श्रीनगर: यासीन मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल को तलाक देने का फैसला किया है। उसने तिहाड़ जेल से जम्मू की अदालत को हलफनामा भेजा है और कहा है कि पिछले 8 सालों से उसकी मुशाल से कोई बातचीत नहीं हुई है। प्रतिबंधित संगठन ‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ प्रमुख यासीन मलिक अभी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। यासीन मलिक 2019 से जम्मू-कश्मीर में टेरर-फंडिंग मामले में जेल में है और बाद में मई 2022 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक ने यह हलफनामा अपने तीन सबसे करीबी लोगों मां, पत्नी मुशाल और अपनी 13 साल की बेटी के लिए एक संदेश के तौर पर लिखा। उसने मुशाल के लिए लिखा कि उसे आखिरी बार उनकी आवाज सुने हुए आठ साल हो गए हैं। इस दौरान उसे न तो फोन पर बात करने की इजाजत मिली और न ही वीडियो कॉल पर उनसे मिलने की।
तलाक लेने की वजह भी बताई
शादी से अलग होने का फैसला क्यों किया, इस बारे में बताते हुए मलिक ने लिखा: “मैं नहीं चाहता कि मुशाल अपनी बाकी ज़िंदगी इन हालात के बोझ तले या विधवा की तरह जिए। मैं चाहता हूं कि वह सम्मान और उम्मीद के साथ अपनी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू करे।” यासीन मलिक ने साफ कहा कि यह हलफनामा दया या सहानुभूति पाने के लिए नहीं लिखा गया। उसने इसे अपनी अंतरात्मा की आखिरी बात बताया। मलिक ने कहा कि उसने अपनी पत्नी को शादी के बंधन से आजाद करने का बेहद दर्दनाक फैसला लिया है, ताकि मुशाल को उस चिंता और अनिश्चितता में न जीना पड़े जो उसकी अपनी किस्मत बन गई है।
हलफनामें में मलिक ने कहा कि मुझे पता है कि आपके साथ मेरा समय कम और अनिश्चित रहा है। आप मुझसे बीस (20 वर्ष) साल छोटी हैं और मैं नहीं चाहता कि आप अपनी बाकी जिंदगी मेरे हालात का बोझ उठाकर या विधवा बनकर बिताएं। इसलिए मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि आप सम्मान और उम्मीद के साथ अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करने की हिम्मत जुटाएं। मैं इस दुनिया में और अगली जिंदगी में भी आप दोनों से हमेशा प्यार करूंगा। आपका सम्मान करूंगा और आपको याद रखूंगा। बता दें कि यासीन मलिक पर कई संगीन आरोप हैं। पिछले महीने अगस्त में मलिक के आवास समेत 8 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।





























































