रायबरेली : राजस्थान के बहरोड़ स्थित CISF आरटीसी परेड ग्राउंड आज उत्साह, अनुशासन और ऊर्जा से भर उठा, जब 49वें बैच के 1440 प्रशिक्षुओं ने पासिंग आउट परेड के साथ अपनी कठिन ट्रेनिंग यात्रा पूरी की। इस ऐतिहासिक समारोह की मुख्य अतिथि रहीं श्रीमती सोनिया नारंग (IPS), इंस्पेक्टर जनरल, NCR सेक्टर, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम में विशेष गौरव जोड़ा।
लेकिन पूरे समारोह का केंद्र बने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के छोटे से गाँव आसानी दरगाह के निवासी कांस्टेबल अनुज गौड़, जिन्होंने 47 सप्ताह की कठोर प्रशिक्षण अवधि में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ‘ऑल-राउंड बेस्ट ट्रेनी ट्रॉफी’ अपने नाम की।
अनुज गौड़: साधारण गाँव से असाधारण उपलब्धि तक का सफर
अनुज गौड़, किसान श्री लल्लन गौड़ और गृहणी श्रीमती पंक्ति देवी के पुत्र, बचपन से ही सादगी, मेहनत और अनुशासन से भरे माहौल में पले-बढ़े। देश सेवा का जज़्बा उनके भीतर तब जागा जब उन्होंने कारगिल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा की प्रेरक कहानियाँ पढ़ीं।
2020 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उन्होंने पूरी लगन से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। उनकी मेहनत रंग लाई और 2024 में 23 वर्ष की उम्र में CISF में चयन हुआ।
47 सप्ताह की ट्रेनिंग: शारीरिक ही नहीं, मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा
आरटीसी बहरोड़ में ट्रेनिंग के दौरान अनुज ने—
ड्रिल,
वेपन हैंडलिंग,
इंटर्नल विषय,
लीडरशिप
सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कठिन परिस्थितियों में भी उनका मंत्र था—
“रुकना नहीं है, जब तक मंज़िल हासिल न हो जाए।”
परेड का गौरवपूर्ण क्षण: जब चमक उठी अनुज की मेहनत
15 नवंबर 2025 को जब अनुज मंच पर ऑल-राउंड बेस्ट ट्रेनिंग ट्रॉफी लेने पहुँचे, उनकी आंखों की हल्की नमी उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा की गवाही दे रही थी। नीचे बैठे माता-पिता के गर्व से भरे चेहरे ने उस पल को और भी ऐतिहासिक बना दिया।
यह उपलब्धि केवल अनुज की नहीं, बल्कि—
उनके गांव,
उनके जिले,
और उन अनगिनत युवाओं की जीत है
जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
अनुज गौड़ की कहानी: युवाओं के लिए प्रेरणा
अनुज की यह यात्रा साबित करती है कि—
सही दिशा, निरंतर प्रयास और मजबूत संकल्प के साथ कोई भी युवा गांव की सीमाओं से निकलकर देश की सुरक्षा की ऊंचाइयों को छू सकता है।





























































