परदेसी मध्य रेलवे में रिक्रूटमेंट सेल के अधिकारी हैं। पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मध्य रेलवे की ग्रुप डी भर्ती प्रक्रिया में मुन्नाभाई की तरह फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। नागपुर में आयोजित शारीरिक पात्रता परीक्षा (PET) में दो असली अभ्यर्थियों की जगह बोगस उम्मीदवार परीक्षा देने पहुंच गए। परीक्षा पूरी होने के बाद दस्तावेजों की जांच के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मामले में अजनी पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे युवकों को परीक्षा में बैठाया
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे युवकों को परीक्षा में बैठाया। इसके लिए प्रवेश पत्र में हेराफेरी करने के साथ फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में दो आरोपी उत्तर प्रदेश और दो राजस्थान के रहने वाले हैं। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय हो सकता है।
जून महीने में आयोजित की गई थी भर्ती परीक्षा
दरअसल, मध्य रेलवे की ओर से जून महीने में ग्रुप डी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की शारीरिक पात्रता परीक्षा नागपुर के अजनी रेलवे स्टेडियम मैदान में कराई गई। इसी दौरान अंकित तिवारी की जगह शिवम यादव बोगस उम्मीदवार बनकर परीक्षा देने पहुंचा। वहीं, दूसरे अभ्यर्थी बुधराम की जगह राहुल कुमार मीणा ने परीक्षा दी।
हेरफेर कर फोटो और फर्जी दस्तावेज लगाए
आरोप है कि दोनों बोगस उम्मीदवारों ने असली अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र में हेरफेर कर अपनी फोटो और फर्जी दस्तावेज लगाए थे। शारीरिक परीक्षा पूरी होने के बाद मध्य रेलवे के रिक्रूटमेंट सेल ने अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच शुरू की। इस दौरान असली उम्मीदवारों के रिकॉर्ड और परीक्षा में शामिल हुए युवकों के दस्तावेजों में अंतर मिला। पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया केस
फर्जीवाड़े का संदेह होने पर मध्य रेलवे रिक्रूटमेंट सेल के अधिकारी राजेंद्र कुमार परदेसी ने अजनी पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच कर रही पुलिस की टीम
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। मामले की जांच में अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय गिरोह की भूमिका भी खंगाली जा रही है।


























































