मतदेय स्थलों के सम्भाजन को लेकर राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक सम्पन्न

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रायबरेली : जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी सरनीत कौर ब्रोका की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के मतदेय स्थलों के सम्भाजन के संबंध में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के सभी मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन करते हुए उनका सम्भाजन किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत 24 जून से 28 जून तक मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन, पुनर्निधारण तथा नए मतदेय स्थलों के लिए भवनों का चिन्हांकन किया गया है। 29 जून से 01 जुलाई तक राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। 4 जुलाई को मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची प्रकाशित कर राजनैतिक दलों को उपलब्ध कराई जाएगी। प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों के निस्तारण के उपरान्त 18 जुलाई तक सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा तथा 25, 27 व 28 जुलाई तक प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजे जाएंगे। इसके बाद आयोग की स्वीकृति की प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूर्ण की जाएगी।
जिलाधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदेय स्थलों के सम्भाजन के संबंध में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रवार मतदेय स्थलों को रनिंग सीरियल नम्बर दिये जायेंगे। मतदेय स्थलों की नई सूची में कोई भी ऑक्जिलरी (सहायक) मतदेय स्थल नहीं रखा जायेगा।
उन्होंने कहा कि जिन मतदेय स्थलों पर मतदाताओं की संख्या मानक से कम है उनका तार्किक विश्लेषण करते हुए उक्त लोकेशन पर उपलब्ध अन्य मतदेय स्थलों में समायोजित कर लिया जाय। विशेष परिस्थितियों में 300 से कम मतदाता वाले मतदेय स्थलों को रखा जाना अपरिहार्य हो, तो प्रस्ताव (अनुलग्नक-1) में उस मतदेय स्थल को बनाये रखे जाने के सम्बन्ध में स्पष्ट कारण का उल्लेख कर दिया जाये। अत्यधिक पुराने व जर्जर भवन वाले मतदेय स्थलों को उसी मतदान क्षेत्र के अन्तर्गत उपलब्ध स्थायी भवन में स्थानांतरित कर दिया जाए। निर्धारित सीमा से अधिक मतदाताओं वाले ऐसे मतदेय स्थल, जहां उसी मतदान केन्द्र पर अन्य मतदेय स्थल भी हैं और उन मतदेय स्थलों में मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है, तो नये मतदेय स्थल का सृजन किये बिना भौगोलिक रूप से क्षेत्र की सुसम्बद्धता बनाये रखते हुए विद्यमान बूथों पर ही मतदाताओं को पुर्नसमायोजित किया जाना है। अस्थायी निर्माण वाले मतदेय स्थलों को उसी मतदान क्षेत्र के अन्तर्गत उपलब्ध स्थायी भवन में स्थानांतरित कर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसे मतदेय स्थलों को चिन्हित किया जाए, जो मुख्य गांव/बस्ती से पर्याप्त दूरी पर हैं, उन मतदेय स्थलों को वहाँ से हटाकर मतदान क्षेत्र के अन्तर्गत किसी सुविधाजनक भवन में स्थापित किया जाए। यह भी सुनिश्चित कर लिया जाए कि मतदेय स्थल की दूरी लगभग 02 कि०मी० से अधिक न हो। कोई मतदेय स्थल यदि अपने मतदान क्षेत्र में उपयुक्त भवन न उपलब्ध होने के कारण मतदान क्षेत्र से बाहर स्थित है और अब मतदान क्षेत्र के अन्तर्गत उपयुक्त भवन उपलब्ध हो गया है तो ऐसे मतदेय स्थल को अपने मतदान क्षेत्र के अन्दर स्थित भवन में शिफ्ट कर दिया जाए। सभी मतदेय स्थल भवनों के यथासंभव भूतल पर होना सुनिश्चित किया जाए। यदि कोई मतदेय स्थल निजी भवन में स्थापित है और वहां यदि शासकीय भवन उपलब्ध हो गये हैं तो उक्त मतदेय स्थलों को शासकीय भवनों में स्थानांतरित कर दिया जाय।
यदि कोई मतदेय स्थल दुकान/व्यवसायिक प्रतिष्ठान/व्यक्तिगत सामुदायिक केन्द्र/विवाह घर अथवा ऐसे भवन, जिनका स्वामित्व किसी राजनैतिक व्यक्ति के पास है, ऐसे मतदेय स्थलों हेतु विकल्प तलाश कर उनको स्थानांतरित कर दिया जाये। मतदेय स्थलों के संबंध में राजनैतिक दलों से प्राप्त सभी शिकायतों तथा सुझावों की सम्यक् रूप से जांच की जाए तथा उन्हें उपयुक्त उत्तर देते हुए उनका निपटान किया जाये।
इस मौके पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी सिद्धार्थ, प्रभारी सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी फिरोज अहमद सहित सम्बन्धित अधिकारी व विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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