रायबरेली : जिला कृषि अधिकारी जनपद के कृषक बंधुओ से कहा है कि चालू रबी सीजन में 25 अक्टूबर 2024 तक जनपद में यूरिया 23910 मेट्रिक टन, डीएपी 3272 मेट्रिक टन, पोटाश 2814 मेट्रिक टन, एनपीके 4746 मेट्रिक टन एवं सिंगल सुपर फास्फेट 1179 मेट्रिक टन वितरण हेतु निजी व सहकारी बिक्री केन्द्रों एवं गोदामों पर उपलब्ध है।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया है कि चालू रबी सीजन में 1 से 25 अक्टूबर 2024 तक यूरिया 3012 मी० टन, डीएपी 5464 मेट्रिक टन, पोटास 917 मेट्रिक टन, एनपीके 1965 मेट्रिक टन, सिंगल सुपर फास्फेट 228 मेट्रिक टन की बिक्री हुई है। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष 1 अक्टूबर 2023 से लेकर 25 अक्टूबर 2023 तक यूरिया 2582 मेट्रिक टन, डीएपी 7618 मेट्रिक टन, पोटाश 289 मेट्रिक टन, एनपीके 456 मेट्रिक टन व सिंगल सुपर फास्फेट 127 मेट्रिक टन की बिक्री हुई थी।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार विगत रबी सीजन की अपेक्षा चालू रबी सीजन में यूरिया 430 मी० टन, पोटाश 628 मी 0 टन, एनपीके 1509 मी०टन व सिंगल सुपर फास्फेट 101 मी 0 टन की अधिक बिक्री हुई है जबकि डीएपी की 2156 मी० टन कम बिक्री हुई है जिसका मुख्य कारण सितम्बर माह में वर्षा का होना है जिसके फलस्वरूप आलू की बुआई में कुछ देर हुई है। साथ ही फास्फेटिक के रूप में एनपीके की बिक्री विगत वर्ष से अधिक हुई है।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया है कि इस समय रबी फसलों की बुवाई हेतु फास्फेटिक उर्वरक जिसमें डीएपी एनपीके एवं सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग किसान बंधुओं द्वारा किया जा रहा है जिसकी समुचित मात्रा उपलब्ध है। किसान भाई डीएपी के स्थान पर अन्य फास्फेटिक उर्वरक जैसे एनपीके एवं सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग गेहूँ, आलू व अन्य फसलों की बुवाई के समय कर सकते हैं। पौधों को डीएपी उर्वरक से मिलने वाला फास्फोरस तत्व एनपीके एवं सिंगल सुपर फास्फेट से भी प्राप्त होगा। इनकी संस्तुत मात्रा का प्रयोग कर फास्फोरस की आपूर्ति आलू, गेहूँ व अन्य रबी फसलों में की जा सकती है।
विगत वर्षों की भांति उर्वरकों की आपूर्ति हो रही है। जनपद में चालू माह में डीएपी उसी तरह से प्राप्त हो रही है जैसे विगत वर्षों में प्राप्त होती थी और आगे भी प्राप्त होती रहेगी। उन्होंने बताया कि 26 अक्टूबर 2024 को जनपद के रैंक पॉइंट पर दो कम्पनियों एन ऍफ़ एल एवं आई पी एल की हाफ रैक लगी हुई है जिसमे से जनपद रायबरेली को एन ऍफ एल एवं आई पी एल कम्पनी की क्रमशः 437 मी० टन एवं 700 मी० टन डीएपी प्राप्त हो रही है जिसे जनपद के निजी उर्वरक बिक्री केन्द्रों के माध्यम से वितरित कराया जायेगा। उन्होंने इसलिए किसान भाइयों से अनुरोध किया है कि किसी प्रकार की अफवाह पर ध्यान ना दें तथा डीएपी अथवा अन्य उर्वरकों का अग्रिम भंडारण ना करें। साथ ही जोत के अनुरूप बोई जाने वाली फसलों के दृष्टिगत संस्तुत मात्रा में ही डीएपी एवं अन्य उर्वरकों का क्रय करें। डीएपी उर्वरक की आपूर्ति किसान बन्धुओं के उपयोग हेतु लगातार कराई जा रही है।
