किसान अपनी फसलों में कीट/रोग समस्या की जानकारी के लिए करें सम्पर्क
रायबरेली : जिला कृषि रक्षा अधिकारी अखिलेश पांडेय ने जनपद के समस्त किसान भाइयों को सलाह दी है कि माह अगस्त में धान की फसल को हानिकारक रोग/कीट के प्रकोप से बचाने के लिए नियमित साप्ताहिक निगरानी करते रहे। मुख्यतः धान की फसल में जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग से बचाव हेतु 15 ग्राम स्ट्रप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत + टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत घोल को 500 से 750 लीटर पानी में प्रति०हे० की दर से छिडकाव करें तथा फफूंदजनित रोग शीथ ब्लाइट एवं झोका रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू०पी० 500 ग्राम मात्रा अथवा थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्लू०पी० 1000 किग्रा० मात्रा 500 से 750 लीटर पानी में घोलकर प्रति०हे० की दर से पर्णीय छिडकाव करने की सलाह दी जाती है।
धान की वानस्पतिक अवस्था में लगने वाले प्रमुख कीट जड की सूडी, दीमक एवं पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु खेत के मेडे घास मुक्त होनी चाहिए तथा यूरिया जैसे उर्वरको का सन्तुलित मात्रा में प्रयोग किया जाय। क्षति आर्थिक स्तर से अधिक होने पर रासायनिक दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। जैसे दीमक/जड की सूडी/पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० 1.25 लीटर मात्रा 500 से 750 लीटर पानी में प्रति०हे० की दर से छिडकाव करें। अथवा फिप्रोनिल 0.3 जी० की 20 किग्रा० मात्रा प्रति/हे० की दर से छिडकाव करने की सलाह दी जाती है।
धान की फसल में जिंक की कमी से होने वाले खैरा रोग के नियन्त्रण हेतु 10-12 किग्रा० जिंक सल्फेट 33 प्रतिशत को 20 किग्रा0 यूरिया में मिलाकर बुरकाव करने की सलाह दी जाती है।
खरीफ में उगाई जाने वाली उर्द/ मूंग में मुख्यतः पीला चित्रवर्ण (मोजैक) विषाणु जनित रोग है जिसका वाहक सफेद मक्खी है, के नियंत्रण के लिए एमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस०एल० 500 एम०एल० मात्रा 500 से 750 लीटर पानी में प्रति०हे० की दर से पर्णीय छिडकाव करें।
किसान भाई अपनी फसलों में कीट/रोग समस्या की जानकारी अपने मोबाइल फोन पर प्राप्त करने के लिये अपना नाम पिता का नाम, गाँव, ग्राम पंचायत, विकास खण्ड, का उल्लेख करते हुए फसल के संक्रमित भाग की फोटो सहित दूरभाष नं0-9452247111, अथवा 9452257111 पर व्हाट्सएप अथवा सन्देश प्रेषित करें। अधिक जानकारी हेतु विकास भवन स्थित कार्यालय जिला कृषि रक्षा अधिकारी अथवा नजदीकी कृषि रक्षा इकाई पर सम्पर्क किया जा सकता है।



























































