रायबरेली : सूत्रों की मानें तो होने वाले जनवरी-फरवरी के त्रिस्तरीय चुनाव में NDA चार भागों में बंट जाएगा। अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद और अरुण राजभर ने भाजपा से अलग पंचायत चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर दिए है।
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने प्रयागराज में अकेले पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इसके बाद निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने भी पंचायत चुनाव अपने-अपने दम पर लड़ने की घोषणा की है। अब बड़ा सवाल है कि तीनों पार्टियों के अलग होने से भाजपा क्या यूपी में अपना चुनावी वर्चस्व कायम रख पाएगी। अगर नतीजे भाजपा के पक्ष में न आए तो क्या इसका असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा या
छोटे दलों का त्रिस्तरीय चुनाव में अलग लड़ने का क्या है कारण
पिछले 2-3 सालों की बात करें तो उत्तर प्रदेश की सियासत में काफी बदलाव देखने को मिला है। सूत्रों की माने तो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और योगी आदित्यनाथ के संबंधों में पहले जैसे मिठास नहीं रही। इसके अलावा बहुत सारे विधायक सरकार के कामकाज से खुश नहीं है। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की हिंदूवादी छवि का प्रभाव में जनता में आज भी प्रभावकारी है, जिसका प्रमाण लोकसभा चुनाव में देखने को भी मिला। लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में भाजपा के साथी छोटे दलों को भी जातीय समीकरण को साधने में संघर्ष करना पड़ा था। यही कारण है कि गठबंधन में तो छोटे दल रहना चाहते हैं, लेकिन अपनी अपनी शर्तों के अनुसार रहना चाहते है।
भाजपा से अलग चुनाव लड़ने की आमतौर पर दो वजहें बताई जा रहीं है।


























































