मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 2,921 गोवंश इच्छुक लाभार्थियों को संरक्षण हेतु किए गए सुपुर्द
रायबरेली : जनपद रायबरेली में निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशों के संरक्षण, संवर्धन एवं बेहतर देखभाल के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। जनपद में संचालित कुल 87 गो आश्रय स्थलों में अब तक 37,446 गोवंशों को संरक्षित किया जा चुका है। गोवंशों के भरण-पोषण, स्वास्थ्य, चारा एवं गर्मी से बचाव सहित गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है।
जनपद में संचालित गो आश्रय स्थलों में 56 अस्थायी गो आश्रय स्थलों में 21,907, 16 स्थायी गो आश्रय स्थलों में 7,798, 07 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों में 5,018 तथा 08 नगर पंचायतों में संचालित गो आश्रय स्थलों में 2,723 गोवंश संरक्षित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत निराश्रित गोवंशों के संरक्षण में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। योजना के तहत अब तक 2,921 गोवंश इच्छुक लाभार्थियों को गो आश्रय स्थलों से संरक्षण हेतु दिए गए हैं, जिससे गोवंशों की देखभाल के साथ-साथ जनसहभागिता को भी बढ़ावा मिल रहा है।
गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों के भरण-पोषण के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी व्यवस्था की गई है। जनपद के 78 किसानों से हरे चारे की व्यवस्था के लिए अनुबंध किया गया है। इसके अतिरिक्त चारा नीति के अंतर्गत वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से 56 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चरी तथा 05 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नेपियर ग्रास की बुवाई के लिए गो आश्रय स्थलों को उपलब्ध कराया गया है।
गोवंशों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गो आश्रय स्थलों में अजोला उत्पादन शुरू किए जाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
गो आश्रय स्थलों को केवल संरक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि उन्हें स्वावलम्बी एवं आत्मनिर्भर इकाइयों के रूप में विकसित करने के लिए विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत बायोगैस प्लांट, वर्मी कम्पोस्ट, बायो फर्टिलाइजर एवं गोबर खाद जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन प्रयासों से गोबर एवं अन्य जैविक अपशिष्ट का सदुपयोग करते हुए गो आश्रय स्थलों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकेंगे।
गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। गो आश्रय स्थलों में पंखे, कूलर एवं फोगर की व्यवस्था के साथ-साथ ट्री गार्ड लगाकर सघन वृक्षारोपण भी कराया गया है। इससे गोवंशों को छायादार एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ गो आश्रय स्थलों के परिसर को हरित बनाने में भी मदद मिल रही है।
गो आश्रय स्थलों के बेहतर संचालन एवं संरक्षित गोवंशों की देखभाल के लिए संचालन कर्मियों के साथ-साथ गोसेवा एवं अन्य सामाजिक संगठनों का सहयोग भी लिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य जनसहभागिता और विभिन्न विभागों के समन्वय से गोवंश संरक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाना है।
जनपद में किए जा रहे ये प्रयास निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ गो आश्रय स्थलों को बेहतर, व्यवस्थित, स्वावलम्बी और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।






























































