रायबरेली : भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य दिवस ‘कृष्ण जन्माष्टमी’ का त्योहार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।
महत्वपूर्ण तिथियां और शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि की शुरुआत: 3 सितंबर 2026, मध्यरात्रि 12:26 बजे से
अष्टमी तिथि का समापन: 4 सितंबर 2026, रात्रि 12:14 बजे तक
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 3 सितंबर, रात 11:30 बजे से
रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 4 सितंबर, रात 12:14 बजे तक
निशिता काल (पूजा का मुख्य मुहूर्त)
श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के संयोग में मध्यरात्रि (आधी रात) को हुआ था, इसलिए बाल गोपाल के जन्मोत्सव का मुख्य पूजन निशिता काल में किया जाता है।
पूजा का शुभ समय: 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक (कुल अवधि: 46 मिनट)
व्रत पारण का समय: 5 सितंबर की सुबह 06:01 बजे के बाद
पूजन विधि संक्षिप्त में
श्रृंगार व अभिषेक: निशिता काल मुहूर्त में लड्डू गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं और सुंदर श्रृंगार करें।
भोग: कान्हा को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, खीर और तुलसी पत्र का भोग लगाएं।
आरती व झूला: बाल गोपाल को झूले में विराजमान कराकर झूला झुलाएं और आरती उतारकर प्रसाद वितरण करें।




























































